नई दिल्ली. इराक के मोसुल में 2014 में अगवा किए गए 39 भारतीयों की हत्या हो चुकी है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में यह बयान देते हुए कहा कि एक पहाड़ी पर सभी भारतीयों को दफना दिया गया था. उन्होंने कहा कि हरजीत मसीहा की कहानी सच्ची नहीं थी. 39 में से 38 भारतीयों के शव को लाशों के ढेर से निकाल कर डीएनए टेस्ट किया गया. इसके बाद उनकी मौत की पुष्टि की गई. उन्होंने कहा कि मारे गए सभी भारतीयों का शव अमृतसर  लाया जाएगा. शवों को राज्य सरकार को सौंपा जाएगा.Also Read - Drone Attack: इराक के इरबिल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन अटैक, जहां तैनात हैं US आर्मी

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5 जून, 2014 को इन लोगों को ISIS के आतंकियों ने बंधक बनाया था. पहाड़ी की खुदाई करवाकर इन शवों को निकाला गया. वहां से उनके हाथ के कड़े और बाल मिले हैं. 39 में से 31 पंजाब के रहने वाले थे. विदेशमंत्री ने कहा कि सभी शव इराक से वापस लाए जाएंगे.

डीप पेनिट्रेशन रडार के जरिए देखा गया था शव

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया कि डीप पेनिट्रेशन रडार के जरिए शवों को देखा गया था, उसके बाद सभी शवों को बाहर निकाला गया. वहां से कई निशान मिले थे और डीएनए की जांच के बाद सभी के मारे जाने की पुष्टि हुई है.

सदन में सुषमा स्वराज

सदन में सुषमा स्वराज

मोसुल पर कब्जे के दौरान आतंकियों ने  बना लिया था बंधक

मारे गए भारतीयों में अधिकतर कामगार थे, जिन्हें इस्लामिक स्टेट (ISIS) के आतंकियों ने साल 2014 में मोसुल पर कब्जे के दौरान बंधक बना लिया था. ये लोग उस समय मोसुल छोड़ने की तैयारी कर रहे थे, तभी ये आतंकियों के हत्थे चढ़ गए. जब ISIS के कब्जे से मोसुल को मुक्त कराया गया, उसके कुछ दिनों के बाद विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह को इराक भेजा गया था.

इससे पहले सुषमा ने अगवा करने की दी थी जानकारी

बता दें कि इससे पहले सुषमा स्वराज ने ही आशंका व्यक्त की थी कि इराक में करीब चार साल पहले अगवा किए गए 39 भारतीय उत्तर पश्चिम मोसुल के बादुश स्थित एक जेल में होंगे. इनमें ज्यादातर लोग पंजाब के रहने वाले थे. खुफिया सूत्रों के हवाले से खबर आई थी कि इन भारतीयों को एक अस्पताल के निर्माण स्थल पर तैनात किया गया था और उसके बाद उन्हें एक खेत में ले जाया गया था. इसके बाद उन्हें पश्चिम मोसुल के बादुश जेल ले जाया गया जहां आईएसआईएस और इराकी बलों के बीच लड़ाई चल रही थी.

सदन में सुषमा ने दिया था ये बयान

गौरतलब है कि पिछले साल इस मुद्दे पर जब लोकसभा में विपक्ष ने सुषमा स्वराज पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया था, तो उन्होंने कहा था कि किसी को बिना सबूत मरा हुआ घोषित कर देना पाप है और वह यह पाप नहीं कर सकती हैं.