नई दिल्ली: जम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में चार जवान शहीद हो गए. पुलिस ने सोमवार को बताया कि मुठभेड़ रविवार देर रात शुरू हुई जब सुरक्षा बलों, राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर), राज्य पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने जैश-ए-मुहम्मद (जेईएम) के आतंकवादियों की यहां छिपे होने की खुफिया सूचना मिलने के बाद पिंगलेना गांव को घेर लिया. पुलिस सूत्रों ने कहा, घेराबंदी जैसे ही कड़ी हुई छिपे हुए आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी. Also Read - Bank Robbery in Greater Noida: बैंक लूट मे शामिल दो आरोपी गिरफ्तार, चेकिंग के दौरान पुलिस के हत्थे चढ़े बदमाश

इलाके में खोज अभियान चलाया जा रहा है. शहीद हुए जवानों में एक मेजर भी शामिल हैं. यह मुठभेड़ पुलवामा में जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर सीआरपीएफ काफिले पर हुए आत्मघाती हमले के एक सप्ताह से भी कम समय में हुई है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, मुठभेड़ जिस जगह हुई वह आत्मघाती हमले के स्थान से लगभग 10 किलोमीटर दूर है. Also Read - पाकिस्तान ने आंतकियों को दी खुली छूट, हाफिज सईद से कहा- कश्मीर में भेजो दहशतगर्द

जम्मू-कश्मीर में गुरुवार को हुए अब तक के सबसे बड़े आतंकवादी हमले में से एक में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे . पाक स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरे वाहन से बल के एक वाहन को टक्कर मार दी थी.

जम्मू-कश्मीर में पिछले पांच साल में देसी बम और अन्य बम विस्फोट लगातर बढ़े हैं. एनबीडीसी की रिपोर्ट इस बात का चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया गया है कि बीते साल 2018 में ऐसी घटनाएं 57 फीसदी बढ़ी हैं जबकि वाम चरमपंथ के क्षेत्रों और उग्रवाद प्रभावित पूर्वोत्तर में ऐसी घटनाएं घटी हैं.

पाकिस्तान और चीन की सीमा से सटे इस राज्य में 2014 में 37 बम (देशी बम एवं अन्य बम) धमाके, 2015 में 46 ऐसे बम धमाके, 2016 में 69 ऐसे बम धमाके, 2017 में 70 ऐसे बम धमाके और 2018 में 117 ऐसे बम धमाके हुए. एनएसजी के नेशनल बम डेटा सेंटर (एनबीडीसी) ने यहां दो दिवसीय सम्मेलन में इस संबंध में एक रिपोर्ट पेश की. हाल ही में यह सम्मेलन हुआ था. ब्लैक कैट कमांडो बल का एनबीडीसी सभी देशी बम और अन्य बम धमाकों पर एक राष्ट्रीय सूचना भंडार है. यह एक ऐसी इकाई है जो पुलवामा विस्फोट समेत सभी ऐसी घटनाओं की जांच भी करती है.