नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में उजागर कथित घूसकांड के बाद छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा के आवास के बाहर गुरुवार को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के चार संदिग्धों को पकड़ा गया. सूत्रों के अनुसार, चारों को बुधवार देर रात जनपथ पर वर्मा के आवास के बाहर जासूसी करते देखा गया. उधर, इस मामले आईबी ने सफाई दी है. आईबी की तरफ से कहा गया है कि इलाका संवेदनशील है इसलिए चारों अधिकारी नियमित गश्त पर थे. अधिकारियों की मौजूदगी को गलत तरीके से पेश किया गया है.

 

बहरहाल, पुलिस उपायुक्त (नई दिल्ली) मधुर वर्मा ने इस बात से इनकार किया कि पुलिस ने चारों को हिरासत में लिया और उनसे पूछताछ की जा रही है. सूत्रों ने बताया कि वर्मा के 2, जनपथ आवास के बाहर बुधवार की रात घूम रहे चार लोगों से संदेह के आधार पर पुलिस ने पूछताछ की और उन्हें ले गयी. हालांकि, डीसीपी ने कहा कि हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. पुलिस ने किसी को हिरासत में नहीं लिया है.

सीबीआई रिश्वत कांड: जांच एजेंसी के मुखिया के अधिकार वापस लेने के सरकार के फैसले पर 26 अक्तूबर को सुनवाई

एम नागेश्वर राव को जांच एजेंसी का तत्काल प्रभाव से प्रभारी निदेशक बनाया
गौरतलब है कि मंगलवार की देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की नियुक्ति समिति से जारी आदेश के तहत, सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया और एम नागेश्वर राव को जांच एजेंसी का तत्काल प्रभाव से प्रभारी निदेशक नियुक्त कर दिया गया. इसके अलावा सरकार ने सीबीआई के कई अधिकारियों का भी तबादला कर दिया.

आलोक वर्मा को अवकाश पर भेजने के मामले में कल होगी सुनवाई
बता दें कि सीबीआई के निदेशक आलोक कुमार वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी अभूतपूर्व जंग बुधवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गयी. शीर्ष अदालत आलोक वर्मा को उनके अधिकारों से वंचित कर अवकाश पर भेजने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर 26 अक्टूबर को सुनवाई के लिये सहमत हो गयी है. शीघ्र सुनवाई के लिये मामलों के उल्लेख करने की परंपरा के बारे में कठोर मानक निर्धारित करने वाले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने आलोक वर्मा की ओर से अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन के उल्लेख पर विचार किया. उन्होंने कहा कि जांच एजेन्सी के मुखिया और विशेष निदेशक को अवकाश पर भेजने के साथ ही संवेदनशील मामलों की जांच कर रहे अनेक अधिकारियों को बदल दिया गया है, इसलिए इस मामले में शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता है. (इनपुट एजेंसी)