नई दिल्ली: नई दिल्ली: राज्यसभा में तेलगू देशम पार्टी के 4 सदस्यों के अपनी पार्टी से अलग होने के आसार को देखते हुए उच्च सदन में पार्टी टूट की कगार पर पहुंच गई है. ऐसी हालत में टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू के लिए यह एक बड़ा झटका है. सूत्रों के अनुसार राज्यसभा में छह सदस्यों वाली तेदेपा के चार सदस्य अलग गुट बनाकर भाजपा में शामिल हो गए हैं.  टीडीपी से अलग गुट बनाने वाले सदस्यों ने राज्यसभा के सभापति एम वैंकेया नायडू को पत्र लिखकर अपने फैसले से अवगत करा दिया है. नायडू को ये बड़ा झटका तब लगा है, जब वे अपनी विदेश यात्रा पर लंदन गए हुए हैं.

राज्यसभा के टीडीपी सांसदों- वाईएस चौधरी, सीएम रमेश, टीजी वेंकटेश और जीएम राव ने गुरुवार को बीजेपी के साथ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के राज्‍यसभा दल का विलय करने का प्रस्ताव पारित किया. जब ये टीडीपी सांसद उपराष्‍ट्रपति से मिलने पहुंचे तो उस वक्‍त भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा, राज्यसभा में सदन के नेता थावर चंद गहलोत और भाजपा सांसद जी किशन रेड्डी भी मौजूद रहे. बता दें कि चंद्रबाबू नायडू की पार्टी के राज्‍यसभा में 6 सांसद हैं. इन चार सांसदों को टूटने से उन पर दलबदल कानून लागू नहीं हो सकता है.

टीडीपी राज्‍य सभा सदस्‍य वाईएस चौधरी, टीजी व्‍यंकटेश, सीएम रमेश ने उपराष्‍ट्रपति व राज्‍यसभा के अध्‍यक्ष वेकैया नायडू से मुलाकात की है. जब टीडीपी राज्‍य सभा सदस्‍य वाईएस चौधरी से पूछा गया कि क्‍या वे बीजेपी ज्‍वाइन करने जा रहे हैं तो उन्‍होंने कहा कि हां, मैं ज्‍वाइन करने जा रहा हूं.

 

लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में टीडीपी को भारी पराजय का सामना करना पड़ा है. बता दें कि चंद्रबाबू नायडू मोदी के खिलाफ गठबंधन बनाने को लेकर काफी सक्रिय रहे थे.

बता दें कि चार सदस्यों का समर्थन मिलने से उच्च सदन में बहुमत के संकट से जूझ रही भाजपा को राहत मिलेगी. भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए के पास राज्यसभा में फिलहाल बहुमत नहीं है.

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता वाली टीडीपी के राज्यसभा में 6 सदस्य हैं और दलबदल विरोधी कानून के मुतबिक किसी दल से अलग हुए नए गुट को तभी मान्यता मिलेगी, जबकि उसके दो तिहाई सदस्य इस गुट में शामिल हों.
राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 245 है. उच्च सदन में सर्वाधिक 71 सदस्यों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है.