By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.
- Hindi
- India Hindi
- 47 Years After 1971 Indo Pak War New Hussainiwala Bridge Constructed
1971 का जंगः आखिर क्यों भारतीय सेना ने अपने ही एक बड़े पुल को कर दिया था तबाह, अब फिर बनकर हुआ तैयार
वर्ष 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए जंग के कई रोचक किस्से हम सभी को सुनने को मिलते हैं. ऐसा ही एक किस्सा पंजाब के फिरोजपुर जिले के हुसैनीवाला से जुड़ा है.
फिरोजपुर (पंजाब): वर्ष 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए जंग के कई रोचक किस्से हम सभी को सुनने को मिलते हैं. ऐसा ही एक किस्सा पंजाब के फिरोजपुर जिले के हुसैनीवाला से जुड़ा है. जंग के दौरान यहां बहने वाली सतलुज नदी पर बने एक पुल को पाकिस्तानी सेना ने नहीं बल्कि भारतीय सेना ने उड़ा दिया था. इसके बाद से यहां एक अस्थायी पुल के जरिए काम चलाया जा रहा था. इस जंग के 47 साल बाद एक बार फिर 280 फुट लंबे पुल का निर्माण करवाया जा सका है. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को हुसैनीवाला में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस पुल का उद्घाटन किया. इस पुल को 1971 के युद्ध में दुश्मन की सेना की बख्तरबंद इकाई को आगे बढ़ने से रोकने के लिए उड़ाया गया था.
जिस पर भारतीय मर-मिटने के लिए रहते हैं तैयार, उसे तैयार करने वाले ‘5 नाम के’ शख्स की पूरी कहानी
पुल को राष्ट्र को समर्पित करते हुए सीतारमण ने कहा कि यह सतलुज नदी पर बने हुसैनीवाला बैराज के साथ फिरोजपुर को जोड़ेगा. मंत्री ने कहा कि यह पुल हुसैनीवाला इनक्लेव को पूरे देश से जोड़ने वाला इकलौता जरिया है जो दो दर्जन से अधिक गांवों के निवासियों के लिए एकमात्र जीवनरेखा है. 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान दुश्मन के बख्तरबंद काफिले को आगे बढ़ने से रोकने के लिए 3 और 4 दिसंबर की रात को पुल के चार हिस्सों को उड़ा दिया गया था. युद्ध के बाद सेना ने अस्थायी पुल बना दिया था. इसके बाद 2015 में 82.40 मीटर लंबा स्थायी पुल बनाने का कार्य सीमा सड़क संगठन को सौंपा गया था.
एक लाख की एक गाय, एक हजार में बेच रही है आर्मी, जानें क्या है मामला
इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने कहा कि हुसैनीवाला का संबंध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव से है, यहीं पर ब्रिटिश सरकार ने फांसी की सजा देने के बाद इन तीनों का अंतिम संस्कार किया था. उन्होंने कहा कि सैनिकों को खुद को सौभाग्यशाली समझना चाहिए जिन्हें भगवान ने इतने पवित्र स्थान में अपनी ड्यूटी करने का मौका दिया है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं उम्मीद करती हूं कि सभी सैनिक उत्साह और साहस के साथ अपने कर्तव्य का पालन करेंगे और मातृभूमि की एक इंच जमीन पर भी दुश्मन कभी कब्जा नहीं कर सकेगा.’’ निर्मला सीतारमण ने सीमा सड़क संगठन की भी सराहना की.
Also Read:
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें