नई दिल्ली. देश में पीढ़ीगत बदलाव के अग्रदूत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आज पुण्यतिथि है. मात्र 40 वर्ष की अवस्था में देश के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बनने वाले राजीव गांधी को भारत में सूचना क्रांति का अगुवा कहा जाता है. वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में आप भले ही राजीव गांधी की बातों, उनकी बनाई नीतियों या उनकी विचारधारा को पसंद न करते हों, लेकिन युवाओं के लिए उनके किए गए कार्यों के कारण इस पूर्व प्रधानमंत्री की याद आना स्वाभाविक है. अपनी मां पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की असामयिक मृत्यु के बाद देश की सत्ता संभालने वाले राजीव गांधी ने देश में लोकसभा चुनाव कराया था. उस चुनाव में कांग्रेस को पिछले सात चुनावों की तुलना में लोकप्रिय वोट अधिक अनुपात में मिले और पार्टी ने 508 में से रिकॉर्ड 401 सीटें हासिल की थीं. लेकिन वर्ष 1991 में आज ही के दिन एक चुनाव अभियान के दौरान ही देश के इस उभरते राजनेता की बम विस्फोट में हत्या कर दी गई. राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर आइए जानते हैं उनसे जुड़ी 5 बातें, जिसके लिए उन्हें देश आज भी याद करता है.

कंप्यूटर क्रांति
आज हम जिस मोबाइल फोन या कंप्यूटर को देखते हैं, उसका भारत में प्रसार करने के पीछे राजीव गांधी जैसे युवा नेता की ही सोच थी. राजीव गांधी मानते थे कि देश को अगली सदी में ले जाने के लिए विज्ञान और तकनीक ही सबसे बेहतर जरिया है. इसीलिए उनके प्रधानमंत्रित्वकाल में विज्ञान और तकनीक के लिए सरकारी बजट बढ़ाए गए. देशवासी कंप्यूटर का इस्तेमाल कर सकें, इसके लिए सरकार की ओर से पहल की गई. यह राजीव गांधी की ही सोच थी, जिसकी बुनियाद पर भारत आज दुनिया में आईटी-पावर या आईटी हब के रूप में जाना जाता है.

शिक्षा नीति
देश को 21वीं सदी में ले जाने के लिए राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए जो सबसे बड़ा काम किया वह शिक्षा से संबंधित था. वर्ष 1986 में राजीव गांधी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एलान किया. इसी के तहत देशभर में जवाहर नवोदय विद्यालय की स्थापना करने की शुरुआत की गई. यह भारत के गांवों में शिक्षा को बढ़ावा देने का अनोखा कार्यक्रम बना. आज देश के सभी राज्यों के विभिन्न जिलों में खुले नवोदय विद्यालयों में लाखों बच्चे पढ़ रहे हैं. यह देश को राजीव गांधी की सबसे बड़ी देन है.

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भ्रष्टाचार
भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर आजादी के बाद बनी सरकार से लेकर अब तक बहस चल रही है. लेकिन यह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ही थे, जिन्होंने देश के सबसे बड़े पद पर रहते हुए पहली बार भ्रष्टाचार की बात स्वीकार थी. उनका चर्चित बयान कि सरकार द्वारा जारी 1 रुपए में से 19 पैसा ही देशवासियों तक पहुंचता है, आज भी शासन-जनित भ्रष्टाचार को लेकर सबसे बड़ा बयान माना जाता है. पीएम रहते हुए राजीव गांधी ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए कड़े कानून बनाए, जो बाद के दिनों में सही साबित हुए. हालांकि प्रधानमंत्री रहते हुए ही उन पर भी बोफोर्स तोप खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगा और चुनाव में हार भी हुई. लेकिन बाद के दिनों में कोर्ट ने उन्हें निर्दोष साबित कर दिया.

पंचायती राज
देश की ग्रामीण आबादी को सशक्त करने की दिशा में भी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का काम सराहनीय रहा था. देशभर में ग्राम-सरकार की अवधारणा लागू करने में उनके द्वारा किया गया 64वां संविधान संशोधन, देश में पंचायतों को सशक्त करने और गांव की आबादी को अपना फैसला खुद करने देने की स्वतंत्रता देने में महत्वपूर्ण पहल माना जाता है. पंचायती राज कानून में संशोधन लागू करते समय राजीव गांधी ने कहा भी था कि जब सत्ता में पंचायतों को वही दर्जा मिलेगा, जो संसद और विधानसभाओं को प्राप्त है, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में गांवों की भागीदारी का रास्ता खुल जाएगा.

पड़ोसी देशों से संबंध
देश के अंदर शिक्षा में सुधार, कंप्यूटर क्रांति, भ्रष्टाचार आदि के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भारत के पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने के लिए भी याद किया जाता है. राजीव गांधी, भारत-चीन युद्ध के बाद बतौर प्रधानमंत्री चीन की यात्रा करने वाले भारत के पहले राष्ट्राध्यक्ष थे. पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने की दिशा में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है. वहीं, पड़ोसी देश श्रीलंका में एलटीटीई पर नियंत्रण के लिए भारत की सैन्य-मदद की पहल भी राजीव गांधी की उपलब्धियों में से एक है. हालांकि उनकी हत्या के लिए वही एलटीटीई जिम्मेदार था, जिसके खिलाफ राजीव गांधी ने सेना भिजवाई थी. इसके अलावा मालदीव संकट के समय में वहां के राष्ट्रपति मो. नशीद की मदद के लिए भारत के तुरंत सेना भेजने की पहल को भी विश्व समुदाय ने सराहा था.