नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने नौकरी करते हुए ऊंची डिग्री हासिल करने वाले अपने कर्मचारियों को दिये जाने वाले एकमुश्त प्रोत्साहन में पांच गुना वृद्धि को मंजूरी दी है. केन्द्र सरकार के दफ्तरों में करीब 48.41 लाख कर्मचारी हैं. अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी. अधिकारियों ने कहा कि पीएचडी जैसी ऊंची डिग्री हासिल करने वालों के लिए प्रोत्साहन की रकम को बढ़ाकर न्यूनतम 10,000 से अधिकतम 30,000 किया जाएगा. कार्मिक मंत्रालय ने कर्मचारियों के लिए इस तरह की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने के वास्ते 20 साल पुराने नियम में संशोधन किया है. अब तक , नौकरी में आने के बाद उच्च डिग्री हासिल करने वाले सरकारी कर्मचारियों को एकमुश्त 2,000 रुपये से 10,000 रुपए के बीच प्रोत्साहन राशि दी जाती थी. अब न्यूनतम प्रोत्साहन राशि को दो हजार से पांच गुना बढ़ाकर दस हजार रुपए कर दिया गया है. Also Read - केंद्रीय कर्मचारियों के 20 दिन की Earned Leave लेने की अनिवार्यता का सरकार ने किया खंडन, कहा- अटकलों से बचे मीडिया

कार्मिक मंत्रालय द्वारा हाल में जारी आदेश के मुताबिक, अब इस राशि को बढ़ाकर न्यूनतम 10,000 रुपए और अधिकतम 30,000 रुपये करने का फैसला किया गया है. आदेश में कहा गया है कि तीन साल या इससे कम की डिग्री / डिप्लोमा हासिल करने पर 10,000 रुपए दिए जाएंगे जबकि तीन साल से अधिक की डिग्री / डिप्लोमा के लिए 15,000 दिए जाएंगे. Also Read - नोटिस पीरियड सर्व किए बिना अब नौकरी छोड़ना पड़ेगा महंगा, 18 फीसदी GST जोड़कर की जाएगी रिकवरी, जानें-पूरा मामला

इसी तरह एक साल या कम की स्नातकोत्तर डिग्री / डिप्लोमा हासिल करने पर 20,000 रुपये और एक साल से अधिक की स्नातकोत्तर डिग्री / डिप्लोमा लेने वाले कर्मचारियों को 25,000 रुपये मिलेंगे. पीएचडी या उसके समकक्ष योग्यता हासिल करने वालों को 30,000 रुपए दिए जाएंगे. Also Read - सरकारी कर्मचारियों-पेंशनरों के लिए बड़ी खुशखबरी, केंद्र सरकार जल्द देगी 28% महंगाई भत्ता

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शुद्ध अकादमिक शिक्षा या साहित्यिक विषयों पर उच्च योग्यता प्राप्त पर कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा. मंत्रालय ने कहा कि हासिल की गई योग्यता (डिग्री / डिप्लोमा) कर्मचारी के पद से जुड़ी होनी चाहिए या फिर अगले पद पर काम आने वाले कार्यों से जुड़ी होनी चाहिए. इसमें कहा गया है कि हासिल योग्यता और पद के कार्य के बीच सीधा संबंध होना चाहिए और इसका सरकारी कर्मचारी की दक्षता में योगदान होना चाहिए.