नई दिल्ली: साहित्य के क्षेत्र में दिए जाने वाले प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार की घोषणा हो चुकी है. इस बार यह पुरस्कार मलयालम कवि अक्कितम अच्युतन नंबूदरी को दिया जा रहा है. 55वां ज्ञानपीठ पुरस्कार की घोषणा से पहले प्रख्यात उड़िया लेखिका प्रतिभा राय की अध्यक्षता में निर्णायक मंडल की बैठक हुई. जिसमें निर्णायक मंडल के अन्य सदस्य शमीम हनफ़ी, सुरंजन दास, माधव कौशिक और डॉ पुरुषोत्तम बिलिमल शामिल थे. बैठक में चली लंबी चर्चा के बाद अक्कितम के नाम की घोषणा की गई.

अक्कितम मलयालम साहित्य के प्रसिद्ध लेखका हैं. उनका जन्म 1926 में हुआ था और उनका पूरा नाम अक्कितम अच्युतन नंबूदरी है, लेकिन वे अक्कितम के नाम से मशहूर हैं. उन्हें बचपन से ही साहित्य और कला में रुचि था. कविता के अलावा अक्कितम ने नाटक और उपन्यास भी लिखे हैं. उनकी अधिकांश काव्य रचनाओं में एक विशिष्ट भविष्यसूचक चरित्र है. वह अपनी कविता में कई सामाजिक-राजनीतिक विकास की भविष्यवाणी करते हैं. अक्कितम अपनी कविता के माध्यम से आधुनिकता दिखाने के लिए प्रसिद्ध हैं.

अक्कितम की कविताएँ भारतीय दार्शनिक और सामाजिक मूल्यों को जोड़ती हैं जो आधुनिकता और परंपरा के बीच एक सेतु की तरह है. उन्होंने अब तक 55 किताबें लिखी हैं और उनमें से 45 कविता संग्रह है. उन्होंने अन्य भारतीय भाषाओं के कार्यों का भी अनुवाद किया है. उनकी सबसे प्रसिद्ध काव्य पुस्तक इरुपदाम नूतनदीदे इतिहसम है जो पाठकों के बीच काफी मशहूर हैं. उनकी कुछ प्रसिद्ध पुस्तकें “खंड काव्य”, “कथा काव्य”, “चरित्र काव्य” और गीत हैं. उनकी कुछ प्रसिद्ध रचनाओं में “वीरवाडम”, “बालदर्शनम्”, “निमिषा क्षेतराम”, “अमृता खटिका”, “अक्चितम कवितातक्का”, “महाकाव्य ऑफ ट्वेंटीथ सेंचुरी” और “एंटीक्लेमम” शामिल हैं. इससे पहले अक्कितम को पद्म श्री से सम्मानित किया जा चुका है. उन्हें 1973 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1972 में केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1988 में केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार और कबीर सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है.