माइनस 40°C वाले क्षेत्र में पहुंची 5G कनेक्टिविटी, सेना ने सियाचिन में मोबाइल टॉवर लगाया

Siachen Glacier: यहां तापमान -50 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है. यह क्षेत्र अपने ठंडे तापमान, बर्फीली हवाओं और बर्फानी तूफानों के लिए जाना जाता है.

Published date india.com Published: January 14, 2025 8:01 AM IST
(सेना ने सियाचिन में मोबाइल टॉवर लगाया)
(सेना ने सियाचिन में मोबाइल टॉवर लगाया)

5G Mobile Tower on the  Siachen Glacier: सेना ने दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर में 5G कनेक्टिविटी पहुंचा कर एक और उपलब्धि हासिल की है. सेना की फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने जियो टेलीकॉम के साथ मिलकर सियाचिन ग्लेशियर पर पहला 5G मोबाइल टॉवर सफलतापूर्वक स्थापित किया है. फायर एंड फ्यूरी सिग्नलर्स और सियाचिन वारियर्स ने उत्तरी ग्लेशियर में 5G BTS स्थापित करने के लिए कठिन इलाकों और -40°C से नीचे के अत्यधिक तापमान को पार किया.

चुनौतियों के बावजूद हासिल की कामयाबी

कराकोरम रेंज में 16,000 फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर मोबाइल टावर लगाना कोई आसान काम नहीं है. यहां तापमान -50 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है. यह क्षेत्र अपने ठंडे तापमान, बर्फीली हवाओं और बर्फानी तूफानों के लिए जाना जाता है.  इन चुनौतियों के बावजूद, सेना ने जियो के साथ मिलकर  ऊंचाई वाली सैन्य चौकी पर तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए टावर लगाने में कामयाबी हासिल की है.

क्यों पड़ी जरूरत

सीमा के दूसरी तरफ चीन तेजी से अपनी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को पूरा कर रहा है. चीन ने अपने हिस्से में हेलीपैड, हवाई पट्टी और अस्थाई गांव तक बना लिए हैं. गलवान की घटना के बाद से ही भारत भी अपने हिस्सें में तेजी से बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है. सियाचिन ग्लेशियर में 5जी मोबाइल इंटरनेट सुविधा मिलने से यहां मौजूद जवानों को बाकी सेंटर्स से कनेक्ट रहने में आसानी होगी.

लद्दाख के गलवान और डेमचोक में भी चलेगा 4 जी इंटरनेट

हाल ही में सेना ने दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ-साथ गलवान और डेमचोक सहित दूरदराज के गांवों को भी 4 जी कनेक्टिविटी से सफलतापूर्वक जोड़ा है. नए साल में देश के सबसे दुर्गम इलाकों में से एक गलवान और डेमचोक में रहने वाले लोग भी मोबाइल में 4 जी इंटरनेट सेवा का लाभ उठा पाएंगे.

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