शिमला: हिमाचल के शिपकी ला दर्रे में गुरुवार को सुबह एक ग्लेशियर खिसक गया, जहां हिमपात में फंसे पांच जवानों की खोज में राहत टीमें अभियान दोबारा शुरू करने के लिए मौसम साफ होने का इंतजार कर रही हैं. हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में बुधवार को 11 बजे हिमपात में सेना की 7 जेएके राइफल्स के छह जवान फंस गए थे. इनमें से एक का शव बरामद कर लिया गया, जबकि पांच की तलाश की जानी है. इन जवानों में चार हिमाचल प्रदेश से और एक उत्तराखंड से तथा एक जम्मू कश्मीर से था.

किन्नौर जिला संपर्क अधिकारी ममता नेगी ने बताया कि भारी बर्फबारी और बारिश की वजह से जवानों को बचाने के अभियान में बाधा आई और सेना अभियान को पुन: शुरू करने के लिए मौसम साफ होने का इंतजार कर रही है.

शिपकी ला सीमा चौकी के पास बुधवार को 11 बजे हिमपात हुआ था. जब शिपकी ला के पास हिमस्खलन तेजी से हुआ तो सेना और आईटीबीपी के 16 जवानों को नामाज्ञा से सीमा चौकी की ओर भेजा गया, जिससे कि वे नष्ट हुई जलापूर्ति लाइन को ठीक कर सकें. सेना के सूत्रों ने बताया कि आईटीबीपी के जवान जलापूर्ति लाइन को देखने के लिए पहाड़ी पर खड़े थे, जबकि सेना के जवान पहाड़ी के नीचे खड़े थे. सेना के छह जवान जिन्दा दब गए. इनमें से एक को बचा लिया गया, लेकिन बाद में चोटों की वजह से उसने दम तोड़ दिया.

नेगी ने कहा कि खोज एवं राहत अभियान बुरी तरह प्रभावित हुआ है, क्योंकि पूह में चार से पांच इंच हिमपात हुआ, जबकि शिपकी ला और आसपास के क्षेत्रों में बुधवार की रात कहीं अधिक हिमपात हुआ.

उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर सुबह से भारी बारिश हो रही है. हालांकि संबंधित कर्मी अभियान जारी रखने के लिए आगे बढ़ गए हैं. फंसे जवानों में से एक को बचा लिया गया था, लेकिन चोटों की वजह से बाद में उसने दम तोड़ दिया. पांच अन्य जवानों का पता नहीं लग सका.

मृतक जवान की पहचान हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमरपुर गांव निवासी राकेश कुमार (41) के रूप में हुई. सेना के सूत्रों ने बताया कि हिमपात में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के पांच जवान भी घायल हो गए. उनकी पहचान बेलंगीन, रजनीश कुमार, मोहम्मद ईशान, रामबरन और तेले टेकचंद के रूप में हुई है.