नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर प्रशासन ने कहा कि घाटी में धीरे-धीरे जनजीवन सामान्य हो रहा है. अनुच्छेद 370 (जो घाटी को विशेष दर्जा देता था) को रद्द करने के सरकार के फैसले के लगभग 68 दिन बाद शनिवार से पोस्टपेड मोबाइल सेवाओं का संचालन फिर से शुरू कर दिया जाएगा. अधिकारियों ने हालांकि, स्पष्ट रूप से कहा कि घाटी में रहने वाले निवासियों को इंटरनेट सेवाओं के संचालन के लिए अभी कुछ और समय तक का इंतजार करना होगा.

अधिकारियों ने कहा कि पोस्टपेड मोबाइल सेवाओं को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया है. हालांकि प्री-पेड सेवाओं को बाद में शुरू किया जाएगा. इसके अलावा पोस्टपेड मोबाइल सेवाओं के लिए ग्राहक का वेरिफिकेशन किया जाएगा. आपको बता दें कि दो महीने पहले जारी पुरानी एडवाइजरी के अनुसार आतंकवादियों द्वारा पर्यटकों को घाटी छोड़ने के लिए मिली धमकी के कारण जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने यह कदम उठाया था. जिसमें मलिक ने सलाहकारों और मुख्य सचिव के साथ एक सुरक्षा समीक्षा बैठक की. जिसके बाद गृह विभाग को निर्देश दिया की घाटी से पर्यटकों को तत्काल प्रभाव से वापस भेजा जाए. प्रशासन द्वारा कुछ दिनों में पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला, फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती सहित अन्य राजनीतिक नेताओं को रिहा करने और अन्य कैदियों को नजरबंदी से हटाने का निर्णय लिया जाएगा.

एक अधिकारी ने बताया कि अगले कुछ दिनों में, वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं और अन्य कैदियों की रिहाई पर फैसला लिया जाएगा. कल, यावर मीर, नूर मोहम्मद और शोयब लोन सहित तीन नेताओं को शांति और अच्छे व्यवहार को बनाए रखने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद रिहा कर दिया गया. इससे पहले 21 सितंबर को, प्रशासन ने पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के इमरान अंसारी और सैयद अखून को स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए रिहा कर दिया था.