अस्पतालों की अमानवीयता का एक और मामला सामने आया है जिसने एक बार फिर अस्पतालों की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामला गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल का है जहां एक बच्ची की मौत हो जाने के बाद अस्पताल ने परिवार को 16 लाख का बिल थमा दिया. इसके बाद परिवार ने गुहार लगाई तो मामला सुर्खियों में आ गया. परिवार का कहना है कि बेटी की मौत आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान ही हो गई थी, लेकिन अस्पताल ने इस बात को छुपाया.

हरकत में स्वास्थ्य मंत्रालय

जब ये मामला वायरल हो गया तो अस्पताल प्रशासन सफाई देने में जुट गया. वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भी इस मामले पर तुरंत हरकत में आ गया है और उसने अस्पताल से रिपोर्ट तलब की है. स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि ये घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, सरकार ने मामले का संज्ञान लिया है. फोर्टिस अस्पताल से पूरे मामले पर रिपोर्ट तलब की गई है और इस मामले में कार्रवाई की जाएगी.

एक न्यूज चैनल से बातचीत में बच्ची के पिता जयंत सिंह ने बताया कि बच्ची की मौत आईसीयू में भर्ती करने के दौरान ही हो चुकी थी, लेकिन अस्पताल ने ये बात छुपाई रखी. बाद में जब बच्ची को रॉकलैंड अस्पताल में दोबारा भर्ती कराया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

वेंटिलेटर पर थी बच्ची

फोर्टिस की ओर से थमाए गए 16 लाख के बिल में से 90 फीसदी बिल तो 15 दिन बच्ची के आईसीयू में ही रहने के दौरान का है. पूरा मामला ये है कि 27 अगस्त को 7 साल की अद्या को डेंगू के चलते द्वारका के रॉकलैंड अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वहां डॉक्टरों ने पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती कराने की बात कह मरीज को फोर्टिस अस्पताल के लिए रेफर कर दिया. यहां अद्या को आईसीयू में भर्ती कराया गया और बेहोशी की हालत में वेंटिलेटर पर रख दिया गया.

डॉक्टरों की आनाकानी

पिता जयंत के मुताबिक इसके बाद डॉक्टर कुछ भी साफ साफ कहने से बच रहे थे. बेटी डायलिसिस पर थी लेकिन कोई कुछ बताने को तैयार नहीं था. 14 सितंबर को बताया गया कि बच्ची का 70 से 80 फीसदी ब्रेन डैमेज हो चुका है. ठीक होने पर भी बच्ची का शरीर पूरी तरह से काम नहीं करेगा. इसके बाद बच्ची को डिस्चार्ज कर दोबारा रॉकलैंड अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इस बीच फोर्टिस अस्पताल ने इस परिवार को 18 लाख रुपये का बिल थमा दिया जिसने परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया.