शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017 को भारत अपना 71वां इन्फेंट्री डे मना रहा है. साल 1947 में यही वह महत्वपूर्ण दिन था जब जम्मू और कश्मीर में पाकिस्तानी सेना और कबाइलियों ने हमला बोल दिया था.. तब भारतीय सेना की पहली इन्फेंट्री रेजिमेंट,1 सिख इन्फेंट्री बटालियन, श्रीनगर फील्ड में उतरी और दुश्मन से कश्मीर घाटी को आजाद कराने के लिए एक साहसिक युद्ध लड़ा. इन्फेंट्री द्वारा इस वीरता के जश्न को मनाने के लिए, 27 अक्टूबर को ‘इन्फेंट्री डे’ के रूप में मनाया जाता है. Also Read - राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, बोले- अचानक बंद होने से भय और भ्रम पैदा हो गया है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 70वें इन्फेंट्री दिवस के मौके पर शुभकामनाएं दी है. PM मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘इन्फेंट्री दिवस पर सभी इन्फेंट्रीमैन को बधाइयां. हमें अपनी इन्फेंट्री के असाधारण साहस और देश को समर्पित उसकी सेवाओं पर गर्व है.’ इसके अलावा इन्फेंट्री डे को लेकर ही किए गए दूसरे ट्वीट में प्रधानमंत्री ने लिखा, ‘मैं सभी इन्फेंट्री शहीदों को नमन करता हूं, जिन्होंने अपने जीवन देश के नाम कर दिए. आने वाली पीढ़ियां भी उनके बलिदान को याद रखेंगी.’ Also Read - कोरोना वायरस: संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सेना ने बढ़ाई सैनिकों की छुट्टियां

इन्फेंट्री डे सिख रेजिमेंट की पहली बटालियन के उस साहसिक बलिदान को याद करने के लिए मनाया जाता है, जो उसने 1947 में दिखाया था. 1947 में जब देश की आजादी के कुछ ही दिन बाद पाकिस्तानी सेना कबाइलियों को साथ लेकर बारामूला को तहस नहस करते हुए श्रीनगर की तरफ बढ़ रही थी, उस समय 27 अक्टूबर, 1947 को सिख रेजिमेंट की पहली बटालियन श्रीनगर के पुराने हवाई अड्डे पर उतरी थी. इसके बाद सिख रेजिमेंट ने अदम्य साहस और त्याग का परिचय देते हुए युद्ध की दिशा बदल दी थी. Also Read - कोरोना वायरस से मुकाबला के लिये पीएम मोदी ने की आपात राहत कोष की घोषणा, अक्षय कुमार ने दिए 25 करोड़

1947 में 22 अक्टूबर को जब जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तानी कबाइलियों ने हमला कर दिया था तो महाराजा हरी सिंह ने 26 अक्टूबर को भारत सरकार के साथ इन्स्ट्रुमेंट ऑफ अक्सेशन ( instrument of accession) दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए थे. गुरुवार को, जम्मू के तवी नदी पुल पर लोगों ने विलय दिवस भी मनाया. इस अवसर पर महाराजा हरी सिंह के पोते विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का विलय भारत के साथ अंतिम है और जो इस पर प्रश्न उठा रहे हैं उनके मुंह पर तमाचा है.

कश्मीर घाटी में जहां अलगाववादी नेता विलय दिवस के खिलाफ anti-accession मना रहे हैं. वहीं, जम्मू में बीजेपी के अलावा करीब एक दर्जन जगहों पर अलग अलग गुटों ने विलय दिवस मनाया. तत्कालीन महाराजा हरी सिंह के दोनों पोते भी विलय दिवस के एक कार्यक्रम में पहुंचे और 71 किलो का लड्डू काटा.

जम्मू में बार एसोसिएशन ने भी विलय दिवस मनाया. एसोसिएशन ने लोगों से कहा कि 26-27 अक्टूबर को सारे जम्मू-कश्मीर में विलय दिवस मनाया जाए. बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, बलबीर सिंह सलाथिया ने बताया कि 26 अक्टूबर को महाराजा हरि सिंह ने विलय पत्र पर दस्तखत किए थे और 27 अक्टूबर को सरकार ने विलय पत्र को स्वीकार किया था. कश्मीर घाटी में शुक्रवार को हुर्रियत कॉन्फ्रेंस और बाकी अलगाववादी नेताओं ने काला दिवस मनाने का फैसला किया है और कश्मीर बंद का आह्वान भी किया है.