नई दिल्ली: मार्केट रिसर्च फर्म इप्सोस द्वारा किए गए सर्वेक्षण में कहा गया है कि कम से कम 73 फीसदी भारतीयों को लगता है कि देश सही दिशा में बढ़ रहा है. इससे पहले जून में किए गए इसी तरह के सर्वेक्षण में तीन फीसदी की बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है. भारत में निराशावाद के वैश्विक रुझान के विपरीत स्थिति देखने को मिली है, क्योंकि कम से कम 58 फीसदी वैश्विक नागरिकों को लगता है कि उनका देश गलत रास्ते पर है. इसके अलावा सर्वेक्षण में शामिल 27 बाजारों में कम से कम 23 निराशावादी महसूस करते हैं और उन्हें लगता है कि वे सही रास्ते पर आगे नहीं बढ़ रहे हैं.

इप्सोस इंडिया के पदाधिकारी पारिजात चक्रवर्ती ने एक बयान में कहा, “भारत जिस दिशा में बढ़ रहा है, उसके लिए भारतीय अत्यधिक आशावादी हैं. पिछले महीने की तुलना में इस दिशा में तीन फीसदी की और वृद्धि हुई है. इसी के साथ भारतीयों के लिए बेरोजगारी की समस्या भी सभी चिंताओं में शीर्ष पर दिखलाई पड़ती है.” उन्होंने कहा, “अपराध एवं हिंसा, वित्तीय और राजनीतिक भ्रष्टाचार (हालांकि पिछले महीने की तुलना में इसमें पांच फीसदी की गिरावट आई है), आतंकवाद (दो फीसदी की गिरावट), गरीबी एवं सामाजिक असमानता (एक फीसदी की कमी) भी चिंता का विषय है. नौकरियां पैदा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए.”

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सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कई राउंड में बेरोजगारी भारतीयों की सबसे बड़ी चिंता है. जबकि इससे पहले बेरोजगारी कभी भी भारतीयों की शीर्ष चिंताओं में नहीं दिखाई दी थी. भारतीयों की चिंता वाले शीर्ष पांच मुद्दों में बेरोजगारी (46 फीसदी), अपराध और हिंसा (37 फीसदी), वित्तीय और राजनीतिक भ्रष्टाचार (34 फीसदी), आतंकवाद (29 फीसदी) और गरीबी और सामाजिक असमानता (28 फीसदी) शामिल हैं.

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