गुंटूर: भारत में 74 साल की उम्र में जहां आदमी दुनियादारी से निवृत्‍त होकर, दूसरे जहां के बारे में सोचने लगता है, लेकिन इस उम्र की महिला ने खुद को बनाने का फैसला किया और वह अपने मंशा पूरी करने में कामयाब रही. मां बनने का पिछले पांच दशक से इंतजार कर रही आंध्र प्रदेश की 74 वर्षीय एक महिला का सपना अंतत: पूरा हुआ और उसने गुरुवार को जुड़वा बच्चों को जन्म दिया. डॉक्टरों का मानना है कि यह नया विश्व रिकॉर्ड हो सकता है.

पूर्वी गोदावरी जिले के नेललापतीर्पाडू की रहने वाली मंगायम्मा शादी के 54 साल बाद भी बच्‍चे की मां नहीं बन सकती तो उसने अपने पति से किसी अस्‍पताल में आईवीएफ (इन व्रिटो फर्टिलाइजेशन) के जरिए बच्‍चा पैदा करने का फैसला किया. इसमें न केवल उसे एक बच्‍चा पैदा करने की चाहत पूरी हुई, बल्कि दो बच्‍चे एक साथ मिल गए.

बता दें कि इससे पहले 70 वर्षीय दलजिंदर कौर को बच्चे को जन्म देने वाली दुनिया की सबसे बुजुर्ग महिला माना जाता था. हरियाणा की कौर ने 2016 में एक आईवीएफ प्रक्रिया के माध्यम से एक बच्चे को जन्म दिया था. गिनीज विश्व रिकॉर्ड के मुताबिक पिछला रिकॉर्ड 2006 में 66 वर्षीय स्पेन की एक महिला के नाम था.

खबर के मुताबि‍क, आंध्र प्रदेश के गुंटूर शहर के अस्पताल में गुरुवार को एक 74 वर्षीय महिला ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया. मंगायम्मा ने यहां अहल्या नर्सिग होम में उसने इन व्रिटो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) प्रक्रिया के माध्यम से गर्भ धारण करने वाली के बाद जुड़वां बच्चों को जन्म दिया है. गुंटूर शहर के अस्पताल में चार डॉक्टरों की एक टीम ने सिजेरियन ऑपरेशन किया. डॉक्टरों की टीम का नेतृत्व करने वाले उमाशंकर ने कहा कि मां और बच्चे दोनों स्वस्थ और ठीक हैं.

पूर्वी गोदावरी जिले के नेललापतीर्पाडू की रहने वाली मंगायम्मा शादी के 54 साल बाद भी संतानहीन थीं. मंगायम्मा ने अपने पति वाई. राजा राव के साथ मिल कर पिछले साल के अंत में नर्सिग होम में आईवीएफ विशेषज्ञों से संपर्क किया. इसके बाद नर्सिग होम ने दंपति की मदद करने का फैसला किया. डॉक्टर नियमित रूप से मंगायम्मा के स्वस्थ्य पर नजर बनाए हुए थे. यहां तक कि नर्सिग होम ने प्रसव से पहले दंपति के सत्कार की व्यवस्था की.

आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के द्रक्षारामम की ई मंगयम्मा ने गुंटुर के निजी अस्पताल में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के जरिए दो जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया. स्त्री रोग विशेषज्ञ डा सनककयला अरुणा ने कहा कि मां और दोनों नवजात बच्चियां सुरक्षित एवं स्थिर हैं. सनककयला अरुणा की ही देखरेख में सी-सेक्शन किया गया.

मंगयम्मा की 1962 में ई राजा राव से शादी हुई थी और इतने सालों में उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी लेकिन जब उनके एक पड़ोसी ने
आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन के जरिए 55 की उम्र में एक बच्चे को जन्म दिया तो उनकी उम्मीद फिर से जगी और उन्होंने आईवीएफ आजमाया.

मंगयम्माने पिछले साल नवंबर में डॉ अरुणा का रुख किया, जो पूर्व में 1999 से 2004 के बीच चंद्रबाबू नायडू कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री रहीं. मंगयम्मा आईवीएफ प्रक्रिया से गुजरी और इस साल जनवरी में गर्भधारण किया.