नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नीले आसमान में सैंकड़ों की तादाद में पतंगे उड़ाई गईं और रंग-बिरंगी पतंगों ने दर्शकों का मन भी लुभाया. पुरानी दिल्ली में पतंगबाजी एक ऐसा शौक है, जिसके दीवाने बच्चे से लेकर बूढ़े तक हैं. हालांकि इस बार दिल्ली में चाइनीज पतंगे नदारद रहीं और हिंदुस्तानी पतंगों ने अपना रंग बिखेरा. वहीं पतंगबाजों ने चाइनीज मांझे की बजाए हिंदुस्तानी मांझे का इस्तेमाल किया.Also Read - देश की आजादी के 75वें वर्ष को मनाने के लिए पीएम मोदी की अध्यक्षता में समिति गठित, सोनिया, ममता और मुलायम सिंह भी शामिल

पुरानी दिल्ली के काइट फ्लाइंग एसोसिएशन के एक सदस्य मोहम्मद आसिफ ने बताया “इस बार पतंग उड़ाने को लेकर लोगों में दो गुना क्रेज है. अंदाजन इस बार हजारों की संख्या पतंगें उड़ाई जा रहीं हैं , वहीं ज्यादातर लोग स्वदेशी पतंग ही खरीद रहे हैं. ” Also Read - सोनिया का मोदी सरकार पर हमला, कहा- सरकार संवैधानिक मूल्यों और प्रजातांत्रिक व्यवस्था के विपरीत खड़ी है

सभी दुकानों में बरेली और जयपुर से आया हुआ मांझा और यहीं की बनी हुई पतंगे नजर आईं. दरअसल लोगों में चाइना को लेकर काफी आक्रोश है, जिसके चलते ज्यादातर लोग चाइनीज सामान खरीद ही नहीं रहें हैं. आसिफ ने बताया कि “हमारी एसोसिएशन में 350 टीमें हैं. पुरानी दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस के दिन हर घर से एक व्यक्ति पतंग उड़ाता है, चाहे वो बच्चा हो या फिर बूढ़ा.” Also Read - स्वतंत्रता दिवस पर रूस, भूटान सहित कई देशों ने दी शुभकामनाएं, पीएम मोदी और विदेश मंत्री ने किया शुक्रिया अदा

हालांकि जब पुरानी दिल्ली के ही निवासी अमीनुद्दीन से बात की तो उनकी राय इस मामले पर अलग थी. उनके अनुसार पुरानी दिल्ली में पतंग कम उड़ रहीं है. जिसकी मुख्य वजह है कोरोना वायरस.