नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा किए गए एक सेरोलॉजिक सर्वेक्षण में मंगलवार को इस बात का खुलासा हुआ है कि दिल्ली की 77 फीसदी आबादी पर अब भी घातक कोरोनावायरस की चपेट में आने का खतरा बना हुआ है. राष्ट्रीय राजधानी की आम आबादी में संक्रमण के प्रसार का अनुमान लगाने के लिए दिल्ली सरकार के समन्वय से नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल द्वारा इस क्रॉस-सेक्शनल सर्वे को किया गया. Also Read - Coronavirus in Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश नहीं थम रही कोरोना की रफ्तार, संक्रमण के 2,304 नए मामले, 45 लोगों की मौत

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के निदेशक सुजीत कुमार सिंह ने कहा, “महामारी के लगभग छह महीने में 22.86 प्रतिशत लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि 77 प्रतिशत आबादी पर अभी भी खतरा बना हुआ है.” Also Read - कोरोना संक्रमित मनीष सिसोदिया को डेंगू भी, प्लेटलेट्स घटने पर LNJP से मैक्‍स अस्‍पताल में शिफ्ट

यह अध्ययन राजधानी में दो आयु वर्ग के लोगों में किया गया जिसमें 18 वर्ष से कम व अधिक उम्र वाले लोग शामिल थे. अधिकतम 21,387 नमूने एकत्र किए गए. ये परीक्षण सामान्य आबादी में एंटीबॉडी की उपस्थिति की पहचान करने में मददगार साबित होंगे. सिंह ने कहा कि ग्यारह जिलों में से आठ में 20 प्रतिशत से अधिक सीरो-प्रचलन है. उन्होंने कहा, मध्य, उत्तर पूर्व, उत्तर और शाहदरा जिलों में लगभग 27 प्रतिशत का सीरो-प्रचलन है. Also Read - पद्मश्री से सम्मानित परमाणु वैज्ञानिक डॉ. शेखर बसु का कोविड-19 से निधन, PM मोदी ने जताया दुख

दिल्ली के सभी ग्यारह जिलों के लिए सर्वेक्षण टीमों का गठन किया गया, लिखित तौर पर सहमति लेने के बाद ही चयनित व्यक्तियों से रक्त के नमूने एकत्र किए गए और फिर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ( आईसीएमआर) द्वारा अनुमोदित कोविड कवच एलिसा का उपयोग करते हुए आईजीजी एंटीबॉडी और संक्रमण के लिए उनके सेरा का परीक्षण किया गया.