नई दिल्ली: दिल्ली में 2000 से ज्यादा बिना सहायता के चल रहे स्कूलों में दो लाख से ज्यादा टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को 7वें वेतन आयोग का लाभ देने में हो रही देरी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार, एमसीडी और स्कूल असोसिएशन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. दिल्ली हाई कोर्ट ने सातवां वेतन आयोग लागू करने के मामले में इन अथॉरिटी से 6 महीने में स्टेटस रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा है. गौरतलब है कि दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों के स्टाफ लंबे समय से 7वेंतन आयोग की मांग कर रहे हैं.

गौरतलब है कि दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक सैलरी की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका लगाई गई है. यह याचिका वकील अशोक अग्रवाल ने दायर की है.

याचिका में कहा गया है कि गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में दिल्ली सरकार और एमसीडी सरकारी स्कूलों की तर्ज पर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के निर्देश दिए जाएं. राजधानी दिल्ली में 2000 से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों में काम करने वाले करीब 2 लाख से ज्यादा टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को सातवें वेतन आयोग के मुताबिक अभी भी वेतन नहीं दिया जा रहा है.

याचिका में बताया गया है कि दिल्ली सरकार की सहमति के बाद एक जनवरी 2016 से सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को यहां लागू कर दिया गया है, लेकिन दिल्ली सरकार की नाक के नीचे नियम होने के बावजूद अभी तक इन सिफारिशों को प्राइवेट स्कूलों में लागू नहीं करवाया गया है.