पठानकोट: अमेरिका निर्मित आठ ‘(Apache AH-65)’लड़ाकू हेलीकॉप्टर मंगलवार को सुबह इंडियन एयर फोर्स में शामिल किए गए. पाकिस्‍तानी सीमा के करीब पठानकोट एयरबेस पर वायुसेना के एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ की मौजदूगी में पूजा अर्चना के बाद अपाचे हेलीकॉप्टर को भारतीय वायुसेना में शामिल किए गए. इससे वायुसेना की युद्धक क्षमता में वृ्द्धि होगी. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने मंगलवार को कहा कि आधुनिक तकनीक से लैस अपाचे 64-ई लड़ाकू हेलिकॉप्टर भारतीय वायुसेना की अभियान और मारक क्षमताओं में वृद्धि करेगा. उन्‍होंने कहा कि आधुनिक तकनीक से लैस अपाचे हेलिकॉप्‍टर सभी मौसमों में दिन-रात तेजी से कार्रवाई करने में सक्षम है.

अधिकारियों ने बताया कि पठानकोट वायुसेना स्टेशन पर आयोजित समारोह में औपचारिक रूप से इन आठ अपाचे हेलीकॉप्टर को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया. वायुसेना में शामिल होने से पहले पूरे विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई. इसके पहले अपाचे हेलीकॉप्टर को कैनन सेल्यूट भी दिया गया. इस समारोह में वायुसेना प्रमुख एयल चीफ मार्शल बीएस धनोआ बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए.

बोइंग ने समारोह में हेलीकॉप्टर की प्रतीकात्मक चाबी वायुसेना को सौंपी. इस मौके पर एयर फोर्स के वेस्टर्न एयर कमांडर एयर मार्शल आर नांबियार भी मौजूद थे.

भारतीय वायुसेना के पीआरओ अनुपम बनर्जी ने बताया, ‘यह भारतीय वायुसेना में इस एयरक्राफ्ट का सेरोमोनियल इंडक्शन है. अभी तक हमारे पास 8 एयरक्राफ्ट हैं. 22 विमान चरणबद्ध तरीके से आएंगे और सभी को भारतीय वायुसेना में शामिल किया जाएगा. हमने पहले भी हेलीकॉप्टर पर हमला किया था, लेकिन यह विमान बहुत सटीक और घातक गोलाबारी करता है.’

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने मंगलवार को कहा कि आधुनिक तकनीक से लैस अपाचे 64-ई लड़ाकू हेलिकॉप्टर भारतीय वायुसेना की अभियान और मारक क्षमताओं में वृद्धि करेगा. पठानकोट वायुसेना स्टेशन में औपचारिक रूप से आठ अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर को भारतीय वायुसेना में शामिल किए जाने के लिए आयोजित एक समारोह में उन्होंने यह बयान दिया. उन्‍होंने कहा कि आधुनिक तकनीक से लैस अपाचे हेलिकॉप्‍टर सभी मौसमों में दिन-रात तेजी से कार्रवाई करने में सक्षम है.

धनोआ ने कहा, ”अपाचे 64-ई लड़ाकू हेलिकॉप्टर पुराने हो रहे एमआई-35 बेड़े की जगह लेंगे. कुल 22 अपाचे लिए जाने है और इसकी आखिरी खेप मार्च 2020 में मिलेगी. धनोआ ने कहा, ये लड़ाकू हेलिकॉप्टर भारतीय वायु सेना की अभियान और मारक क्षमताओं में वृद्धि करेंगे. हेलिकॉप्टर आधुनिक तकनीक से लैस हैं और इन्हें पश्चिमी क्षेत्र में तैनात किए जाएंगे.

उन्होंने कहा कि अपाचे हेलिकॉप्टर का भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल होना इसके आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. धनोआ ने कहा कि आधुनिक तकनीक से लैस अपाचे हेलीकॉप्टर सभी मौसमों में दिन रात तेजी से कार्रवाई करने में सक्षम हैं.

‘अपाचे एएच-64 ई’दुनिया के सबसे उन्नत बहु-भूमिका वाले लड़ाकू हेलि‍कॉप्टर हैं और अमेरिकी सेना इनका इस्तेमाल करती है. भारतीय वायुसेना ने 22 अपाचे हेलि‍कॉप्टर के लिए अमेरिकी सरकार और बोइंग लिमिटेड के साथ सितंबर 2015 में कई अरब डॉलर का अनुबंध किया था.

मारक खूब‍ियां 

1. अपाचे से फायर किया जाने वाला हेलीफायर मिसाइल 6 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य पर अचूक निशाना लगाया जा सकता है. इससे हमला खराब मौसम में भी किया जा सकता है. इसकी मिसाइल का अचूक निशाना अपाचे को टैंक का सबसे बड़ा शिकारी कहा जाता है.

2. अपाचे में रोशनी और अंधेरे में लड़ने की क्षमता है. इसमें लगे कैमरे रात के अंधेरे में भी दोस्त और दुश्मन की पक्की पहचान कर सकते हैं. छिपने की कोशिश करते हुए टैंक की लोकेशन भी अपाचे के कैमरे पता लगा लेते हैं. ऐसे में अपाचे के निशाने से टैंक का बचना मुश्‍क‍िल हो जाता है.

3. पहला हमला कम से कम वक्त में करना अपाचे की विशेषता है. पायलट जिस तरफ देखते हैं, उसमें लगी ऑटोमेटिक गन उसी दिशा में घूम जाती है. अपाचे (Apache) में हाइड्रा अनगाइडेड रॉकेट भी हैं, जो 8 किमी. तक टारगेट को तबाह करने क्षमता रखते हैं.

4. अपाचे का फायर कंट्रोल रडार एक साथ 256 लक्ष्यों पर नज़र रख सकता है.

5. दुश्मन की मिसाइलों से बचने के लिए अपाचे में फ्लेर (Flare) लगा होता है. दुश्मन की मिसाइल हेलिकॉप्टर के इंजन की गर्मी का पीछा करके हमला करती हैं. इन मिसाइलों से बचने के लिए अपाचे में लगे फ्लेर्स हवा में छोड़े जाते हैं, जो मिसाइलों को भटकाने के लिए काफी अधिक तापमान पर जलते हैं. इसकी वजह से मिसाइलें इन फ्लेर्स को निशाना बनाती हैं और अपाचे (Apache) सुरक्षित बच जाता है.

6. अपाचे  हेलि‍कॉप्टर से 30 मिमी की मशीनगन से लैस है, जिसमें एक बार में 1200 तक राउंड हो सकते हैं.

7- अपाचे एंटी टैंक हेलफ़ायर मिसाइल से भी लैस है, जो टैंक को तबाह करने में सक्षम है

8 . अपाचे 150 नॉटिकल मील (करीब 277 किलोमीटर) की स्‍पीड से उड़ान भर सकता है, जो इसे हवा में तेज स्‍पीड से टारगेट के पास जाने में सक्षम है.