नई दिल्ली. आंध्र प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का असर साफ नजर आने लगा है. जगन मोहन रेड्डी (Jagan Mohan Reddy) की सरकार ने पूर्ववर्ती टीडीपी (TDP) सरकार के फैसलों की समीक्षा करनी शुरू कर दी है. इसके तहत बुधवार को उस भवन को ढाहने की कार्रवाई शुरू हुई, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू (N. Chandrababu Naidu) की सरकार ने बनवाया था. पांच करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए प्रजा वेदिका भवन को गिराने का आदेश दो दिन पहले ही जगन सरकार ने दिया था. इस पूरे मामले पर गौर करने वाली बात यह है कि इस महीने की शुरुआत में टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू ने राज्य सरकार को चिट्ठी लिखकर यह आग्रह किया था कि प्रजा वेदिका के इस्तेमाल की अनुमति दी जाए, ताकि टीडीपी इसे अपनी बैठकों के लिए इस्तेमाल कर सके. लेकिन जगन रेड्डी की सरकार ने इस चिट्ठी के बाद पूरी बिल्डिंग को ही अवैध करार देते हुए इस ढाहने का आदेश जारी कर दिया.

आपको बता दें कि प्रजा वेदिका भवन पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के अंदावल्ली स्थित आवास का विस्तार है. बुधवार को राज्य सरकार के भेजे गए बुल्डोजर प्रजा वेदिका को ढाहने के लिए पहुंच गए. मुख्यमंत्री जगन रेड्डी द्वारा इस भवन को ढाहने का फैसला करने की कहानी भी रोचक है. सीएम जगन रेड्डी ने प्रजा वेदिका परिसर में कलेक्टरों का सम्मेलन बुलाकर अपने निर्णय की घोषणा की. यह बताते हुए कि प्रजा वेदिका तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा नियमों का उल्लंघन करते हुए बनाई गई संरचना है, जगन रेड्डी ने घोषणा की कि उनकी सरकार का अवैध ढांचों के खिलाफ अभियान इस ढांचे के विध्वंस के साथ शुरू होगा. कुछ दिन पहले हुए इस सम्मेलन में जगन रेड्डी ने कहा, “यह यहां हो रही आखरी बैठक है.” रेड्डी की सरकार ने शनिवार को ही प्रजा वेदिका पर अधिकार प्राप्त किया. इससे पहले यहां नायडू रह रहे थे, वह वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष हैं.

जिला कलेक्टरों के सम्मेलन के बाद बीते सोमवार को मुख्यमंत्री ने प्रजा वेदिका को गिराने का आदेश जारी किया. नाटकीय घटनाक्रम ऐसे समय में आया जब मुख्य विपक्षी तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष नायडू अपने परिवार के साथ विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं. जगन रेड्डी के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए टीडीपी ने इसे प्रतिशोध की राजनीति करार दिया. पार्टी ने कहा कि ढांचे का निर्माण तत्कालीन सरकार ने पूरे नियम और कानून के साथ करवाया था. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने यह आदेश इसलिए दिया क्योंकि वह हमारे नेताओं को इसका इस्तेमाल नहीं करने देना चाहते हैं. आपको बता दें कि नायडू ने 4 जून को मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर कहा था कि उन्हें प्रजा वेदिका का इस्तेमाल करने की इजाजत दी जाए, ताकि वह इसका इस्तेमाल बैठकों के लिए कर सके.

(इनपुट – एजेंसी)