नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस महामारी  के चलतेे लागू लॉकडॉउन के दौरान लाखों प्रवासी श्रमिक दूसरे राज्‍यों से अपने घर जाने के लिए हजारों किलोमीटर पैदल जाते हुए देखे गए हैं, लेकिन दिल्‍ली का एक किसान ऐसा है, जो अपने यहां काम करने वाले श्रमिकों को बसों  या ट्रेन से नहीं, बल्कि सीधे प्‍लेन से बिहार भेज रहा है. Also Read - WHO ने कोरोना के हवा में फैलने के मामले को लेकर जारी की गाइडलाइंस, साथ ही कही ये बात

बिहार के 10 प्रवासी मजदूरों के घर वापसी के सपनों को लॉकडाउन शुरू होने के दो महीने बाद पंख मिले हैं, जब वे अपने नियोक्ता की मदद से बिहार की हवाई यात्रा कर रहे हैं. Also Read - यूजीसी को परीक्षाएं रद्द कर विद्यार्थियों को पहले के प्रदर्शन के आधार पर प्रोन्नत कर देना चाहिए: राहुल

इन प्रवासियों की बिहार की राजधानी पटना की उड़ान गुरुवार सुबह छह बजे की है. इन्होंने अप्रैल में घर जाने की योजना बनाई थी और अब उन्हें भरोसा नहीं हो रहा कि वे समस्तीपुर में अपने घर पैदल चलकर या साइकिल से नहीं, बल्कि विमान यात्रा करके जाने वाले हैं. Also Read - Coronavirus in Rajasthan Update: राजस्थान में नहीं थम रहा कोरोना का संक्रमण, 115 नए मामले, चार लोगों ने गंवाई अपनी जान

अपने बेटे के साथ लौट रहे लखिंदर राम ने कहा, ”मैंने जिदंगी में कभी नहीं सोचा था कि एक दिन हवाई जहाज में सफर करूंगा। मेरे पास अपनी खुशी बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं. लेकिन मुझे थोड़ी घबराहट भी है कि कल हवाईअड्डे पर पहुंचने पर हमें क्या करना होगा. उन्होंने दिल्ली के तिगिपुर गांव के मशरूम उत्पादक किसान पप्पन सिंह का आभार जताया, जिनकी मदद से प्रवासियों की नई कहानी लिखी जा रही है.

लखिंदर ने जब पत्नी को बताया कि वह विमान से घर लौटेंगे तो वह सहसा विश्वास नहीं कर पाई. उनका बेटा नवीन राम पप्पन के खेतों में आठ साल से काम कर रहा है, जबकि 50 वर्षीय लखिंदर खुद 27 साल से उनके साथ काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि 25 मार्च को लॉकडाउन के बाद से उनके नियोक्ता ने उनके रहने, खाने का पूरा ध्यान रखा.

पप्पन ने बताया कि उन्होंने 68,000 रुपए के टिकट बुक किए और सभी को तीन-तीन हजार रुपए नकद दिए ताकि घर पहुंचने में उन्हें किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़े. उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह वह अपने सभी कर्मचारियों को अपने वाहनों से हवाईअड्डे पर छुड़वाएंगे.

पप्पन ने बताया, ये सभी 10 कर्मचारी बिहार के लिए ट्रेन से अप्रैल के पहले ही हफ्ते में निकल लिए होते, लेकिन लॉकडाउन के कारण वे नहीं जा पाए. उन्होंने बताया कि श्रमिक विशेष ट्रेनों से उन्हें घर भेजने में जब वह सफल नहीं हुए तब यह फैसला लिया. उन्होंने कहा, ”मैं उन्हें हजारों मील पैदल भेजने का जोखिम नहीं ले सकता था. इससे उनका जीवन खतरे में पड़ सकता था.” सभी दस कर्मचारियों के स्वास्थ्य जांच प्रमाण पत्र मिल चुके हैं और वे हवाई यात्रा करने के लिहाज से स्वस्थ हैं.