नई दिल्ली. पूर्व दूरसंचार मंत्री एंदीमुथु राजा ने 2जी स्पेक्ट्रम नीति को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की स्पष्ट चुप्पी पर सवाल उठाये हैं. राजा का कहना है कि मनमोहन उस दूरसंचार नीति का बचाव करने के लिए कुछ क्यों नहीं बोले जिसे उन्होंने खुद मंजूरी दी थी. उल्लेखनीय है कि सीबीआई की एक अदालत ने 2जी स्पेक्ट्रम आंवटन घोटाला मामले में ए राजा सहित सभी आरोपियों को हाल ही में बरी कर दिया. Also Read - सोनिया गांधी ने विदेश, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक मामलों पर तीन समितियों का गठन किया, मनमोहन सभी का हिस्सा

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अपनी किताब 2जी सागा अनफोल्डस में राजा ने तत्कालीन नियंत्रक व महालेखा परीक्षक विनोद राय पर निशाना साधा है. राजा के अनुसार राय ने गलत उद्देश्यों के चलते कैग के पद का एक तरह से सौदा कर लिया. राजा का दावा है कि नयी कंपनियों को 2जी दूरसंचार स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए उन्होंने मनमोहन सिंह की मंजूरी ली थी. उन्होंने इससे पहले मनमोहन को सारी प्रक्रिया के बारे में बताया और यह भी सूचित किया कि इसके लिए पर्याप्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध होगा है. Also Read - Manmohan Singh Birthday: प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व PM डॉ. मनमोहन सिंह को दी जन्मदिन की शुभकामनाएं, ट्वीट कर लिखा...

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किताब में दावा किया गया है कि सिंह को उनके सलाहकारों ने बारंबार गलत सूचनाएं दी और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) दूरसंचार लॉबी के दबाव में था. राजा के अनुसार, मेरी पूरी तरह से उचित कार्रवाइयों के बचाव के संबंध में संप्रग सरकार और डा मनमोहन सिंह की स्पष्ट चुप्पी कुछ ऐसी ही है जैसे हमारे देश की समूची अंतरात्मा ने चुप्पी साथ ली हो.

इसके साथ ही राजा का दावा है कि पूर्व प्रधानमंत्री को स्पेक्ट्रम आवंटन के संबंध में सीबीआई द्वारा मारे जा रहे छापों की कोई सूचना नहीं थी. उन्होंने लिखा है, 22 अक्तूबर 2009 को सीबीआई द्वारा दूरसंचार मंत्रालय व कुछ दूरसंचार कंपनियों के कार्यालयों पर छापेमारी के बाद, मैं शाम सात बजे प्रधानमंत्री से मिला. पीएमओ में प्रधान सचिव टी के ए नायर भी उस समय मौजूद थे. लोगों को हैरानी होगी कि प्रधानमंत्री को जब मैंने सीबीआई के छापों के बारे में बताया तो वे कुछ हतप्रभ रह गए. अपनी किताब में राजा ने 2जी घोटाले को देश की प्रशासनिक प्रणाली की पवित्रता पर शर्मनाक धब्बा करार दिया है.