नई दिल्ली: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने लोगों से अपना आधार नंबर सोशल मीडिया पर शेयर नहीं करने का निर्देश दिया है. लोगों के सवालों का जवाब देते हुए यूआईडीएआई ने कहा कि लोगों को सोशल मीडिया पर आधार नंबर शेयर नहीं करने का निर्देश दिया गया है. हालांकि इसका यह कतई मतलब नहीं है कि आप अपना आधार स्वतंत्र होकर इस्तेमाल नहीं कर सकते. आप बिना किसी संकोच के अपना आधार नंबर इस्तेमाल कर सकते हैं. आप अपने बैंक अकाउंट नंबर, पैन कार्ड और डेबिट कार्ड की तरह आधार कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं.

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आप अपनी पहचान स्थापित करने के लिए बिना किसी संकोच के अपना आधार कार्ड इस्तेमाल कर सकते हैं. आपको अपना आधार कार्ड इस्तेमाल करते समय उसी तरह की सावधानी बरतनी होगी जैसा कि आप अपने अन्य पहचान पत्र के साथ बरतते हैं. यूआईडीएआई का कहना है कि आप बिना किसी वजह के अपनी पहचान पब्लिक प्लेस पर सार्वजनिक नहीं करते. यही लॉजिक आधार के लिए भी लागू होती है. यूआईडीएआई की ओर से ये सफाई ऐसे समय में आई है जब ट्राई के चीफ आरएस शर्मा ने अपना आधार नंबर सोशल मीडिया पर शेयर कर नुकसान पहुंचाने की चुनौती दी थी.

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यह पूछे जाने पर कि किसी का आधार नंबर जानने के बाद क्या उसे किसी तरह का नुकसान पहुंचाया जा सकता है. यूआईडीएआई का कहना है कि यह संभव नहीं है. अन्य पहचान पत्र की तुलना में आधार ज्यादा सुरक्षित है. इसे वेरिफाई करने के लिए फिंगरप्रिंट की जरूरत होती है. इसके अलावा ओटीपी, क्यूआर कोड का भी इस्तेमाल होता है. ऐसे में आधार नंबर जान लेने से किसी को नुकसान पहुंचाना संभव नहीं है. यूआईडीएआई का कहना है कि बिना फिंगरप्रिंट और ओटीपी के माध्यम से सिर्फ आधार कार्ड की बदौलत अगर कोई बैंक अकाउंट खुलता है तो इसके लिए बैंक जिम्मेदार होंगे.

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दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने उस याचिका पर केंद्र और यूआईडीएआई से जवाब मांगा जिसमें आधार डाटा की सुरक्षा और लोगों की निजता के बारे में चिंता जताई गई है. यह चिंता भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के डाटाबेस से लोगों की निजी सूचना के कथित लीक की कई घटनाओं के मद्देनजर जताई गई है.पीठ ने मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 19 नवंबर को निर्धारित कर दी.

केरल के वकील याचिकाकर्ता शमनाद बशीर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि आधार व्यवस्था में इस साल जनवरी से कई बार सुरक्षा उल्लंघन हुआ है जिससे लोगों की निजी सूचना लीक हुई है. इसमें दावा किया गया है कि यूआईडीएआई और केंद्र लोगों को क्षतिपूर्ति देने के लिये जिम्मेदार है, जिनके डाटा के साथ समझौता किया गया.