नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा को 2019 के चुनाव में टक्कर देने के लिए उनके विरोधी किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं. तभी को एक समय कांग्रेस विरोध से राजनीति की शुरुआत करने वाली आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच आगामी लोकसभा चुनाव के लिए खिचड़ी पकने लगी है. इसकी पहली झलक इस महीने की 9 तारीख को हुई विपक्षी दलों की बैठक में देखने को मिली जब उक्त बैठक में आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि भी शामिल हुए. Also Read - किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है कांग्रेस पार्टी, सरकार बनने पर निरस्त होंगे ‘काले कृषि कानून’: रणदीप सुरजेवाला

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सूत्रों का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव के लिए दिल्ली सहित हरियाणा और पंजाब में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच गठबंधन पर बातचीत चल रही है. दोनों दल दिल्ली में 4:3, पंजाब में 9:4 और हरियाणा में 7:3 के फॉर्मूले पर चुनाव लड़ सकते हैं. यानी दिल्ली की सात लोकसभा सीटों में से चार पर कांग्रेस और तीन पर आप, पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में से 9 पर कांग्रेस और चार पर आप व हरियाणा की 10 लोकसभा सीटों में से 7 पर कांग्रेस और तीन पर आप चुनाव लड़ सकती है. Also Read - इंटरव्यू: चिदंबरम ने कहा- BJP देश में निरंकुशता और नियंत्रण युग वापस लाएगी, देश पीछे जाएगा

सूत्रों का कहना है कि इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रदेश इकाइयों को तैयार करने की रणनीति पर काम करने को कहा है. कहा जा रहा है कि सीट शेयरिंग के इस फॉर्मूले पर कांग्रेस की प्रदेश इकाइयों की सहमति मिलने के बाद ही बात बनेगी. हालांकि सूत्रों ने ये भी कहा कि आम आदमी पार्टी दिल्ली में अपनी शर्तों पर सीट शेयरिंग करना चाहती है. वह पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में भले ही समझौता कर ले.

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सूत्रों ने कहा कि अक्सर कांग्रेस के आलोचक रहे अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा को टक्कर देने के लिए गठबंधन की जरूरत को समझने लगे हैं. कुछ दिन पहले संभावित गठबंधन को लेकर पूछे जाने पर केजरीवाल ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी इस देश के भविष्य के बेहद खतरनाक है. अगर ये पार्टी 2019 में वापसी करती है तो कुछ भी नहीं बचेगा. अब यह देश के हर नागरिक की जिम्मेवारी है कि वह इस जोड़ी को हराने के लिए कदम उठाए.

कुछ माह पहले आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में गठबंधन के लिए कांग्रेस को 5:2 का फॉर्मूला सुझाया था. यानी दिल्ली की 5 संसदीय सीटों पर आप और दो पर कांग्रेस चुनाव लड़े लेकिन दिल्ली प्रदेश इकाई ने इस फॉर्मूले को खारिज कर दिया, जिस कारण गठबंधन नहीं हो सका.