नई दिल्ली: दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल अनिल बैजल के बीच जारी गतिरोध के बीच सुप्रीम ने मंगलवार को शहर के अधिकारियों की तैनाती और तबादलों सहित सेवा से जुड़े विवादास्पद मुद्दे पर आम आदमी पार्टी की याचिका पर सुनवाई पर सहमति जता दी है. कोर्ट ने कहा कि चल रहे गतिरोध पर अगले सप्ताह याचिका पर सुनवाई की जाएगी.  आप सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा ने ट्वीट कर कहा कि प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अदालत में याचिका दायर हो गई है, और मामले का जल्द निपटारा करने का आग्रह किया गया है. Also Read - Farmers Tractor Rally: हिंसा की जांच के लिए आयोग गठित करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

राहुल मेहरा ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने संकेत दिया है कि मामला अगले सप्ताह उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा. मेहरा ने कहा कि दिल्ली सरकार शीर्ष अदालत के पास इसलिए पहुंची है, क्योंकि अधिकारियों के स्थानान्तरण और तैनाती के अधिकार और शक्ति को लेकर अभी भी भ्रम है. बता दें कि शीर्ष अदालत ने चार जुलाई को दिए फैसले में कहा था कि दिल्ली के उपराज्यपाल संवैधानिक रूप से चुनी हुई सरकार की ‘सहायता और सलाह’ को मानने के लिए बाध्य हैं.

केजरीवाल सरकार की याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई
सर्वोच्च अदालत ने मंगलवार को कहा कि वह दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारियों की तैनाती और तबादलों सहित सेवाओं को लेकर चल रहे गतिरोध पर अगले सप्ताह याचिका पर सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में पीठ ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार की याचिका पर नियमित बेंच द्वारा सुनवाई की जाएगी. शीर्ष अदालत ने चार जुलाई को दिए फैसले में कहा था कि दिल्ली के उपराज्यपाल संवैधानिक रूप से चुनी हुई सरकार की ‘सहायता और सलाह’ को मानने के लिए बाध्य हैं.

केजरीवाल सरकार और और उपराज्य बैजल के बीच तकरार जारी 
– दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को उप राज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पूरी तरह लागू करवाने की अपील की
– केजरीवाल ने कहा कि इस आदेश में तीन मामलों को छोड़कर बाकी सभी में दिल्ली सरकार की वरीयता स्थापित की गई है
– बैजल ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि मामला शीर्ष अदालत की एक नियमित पीठ के समक्ष लंबित है, इसलिए समय से पहले निष्कर्ष नहीं निकालें.
– केजरीवाल ने बैजल द्वारा शीर्ष कोर्ट के फैसले को चयनात्मक रूप से स्वीकार किए जाने पर सवाल पूछा और किसी भी भ्रम की स्थिति में उन्हें तत्काल सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी.
– केजरीवाल ने 9 जुलाई को लिखे पत्र में कहा, “मैं आपको फिर से सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को पूर्णत: लागू करवाने का आग्रह करता हूं
– गृह मंत्रालय के पास सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की व्याख्या करने का अधिकार नहीं है.
– अगर आपको कोई भी भ्रम है, आप स्पष्टीकरण के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख करें और कृपया न्यायालय के फैसले का उल्लंघन न करें.

एल जी को भेजे पत्र में सीएम केजरीवाल ने लिखी ये बात
सीएम केजरीवाल ने यह भी लिखा कि उप राज्यपाल फाइल और आदेश के एक भाग को मानने के लिए तैयार हैं, लेकिन उस भाग को लागू नहीं कर रहे हैं जिसमें कहा गया है, ‘केंद्र सरकार की कार्यकारी शक्तियां केवल तीन विषयों तक ही सीमित हैं.’ उन्होंने लिखा, “आप फैसले को अपनी पसंद-नापसंद के हिसाब से स्वीकार कैसे कर सकते हैं? या तो आप एक पक्ष लें कि सभी मामले अब एक नियमित खंडपीठ के समक्ष रखे जाएंगे और इसलिए आप आदेश के किसी भी भाग को लागू नहीं करेंगे या नहीं तो आपको पूरे आदेश को स्वीकार करना चाहिए और लागू करना चाहिए. आप यह कैसे कह सकते हैं कि आप आदेश के इस खास भाग को स्वीकार करेंगे और किसी अन्य भाग को स्वीकार नहीं करेंगे.”

बैजल ने केजरवाल को जवाब में ये कहा
बैजल ने इसके जवाब में एक बयान जारी कर कहा, “जब याचिका नियमित पीठ के पास अभी भी लंबित है, तो इस संबंध में पहले ही निष्कर्ष निकाल लेना जल्दबाजी होगी.” उन्होंने कहा, “पूरे फैसले और इसके कार्यान्वयन का अभी भी अध्ययन किया जा रहा है. इस पर ध्यान दिया जा सकता है कि अंतिम पैरा में, कोर्ट ने संदर्भ का जवाब देते हुए इस मामले को उचित नियमित पीठ को भेजने के आदेश दिए थे. इसलिए, यह मामला तब पूरी तरह स्पष्ट होगा, जब नियमित पीठ में लंबित सुनवाई पूरी हो जाएगी.” बैजल ने यह भी कहा कि केजरीवाल का पत्र यहां पहुंचने से पहले ही सोशल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित हो चुका था. (इनपुट- एजेंसी)