नई दिल्ली।  मनी लॉन्डरिंग केस में दिल्ली के स्वास्थ्य एवं बिजली मंत्री सत्येंद्र जैन की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं. मनी लॉन्डरिंग के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने आज उनसे पूछताछ की. अधिकारियों ने बताया कि प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत जैन को तलब किया गया था. मामले का जांच अधिकारी उनके बयान को दर्ज करेगा.

सीबीआई की एफआईआर के आधार पर पिछले साल अगस्त में प्रवर्तन निदेशालय( ईडी) ने मनी लॉन्डरिंग का मामला दर्ज किया था. सीबीआई में दर्ज शिकायत में कहा गया कि जैन उन चार कंपनियों को प्राप्त धन का स्रोत नहीं बता पाए जिन कंपनियों में वह शेयरधारक थे.

जैन की पत्नी के खिलाफ भी केस

सीबीआई ने उनके, उनकी पत्नी और चार अन्य के खिलाफ मनी लॉन्डरिंग का एक मामला दर्ज किया था. एजेंसी ने इस मामले में उनसे पहले भी पूछताछ की थी. सीबीआई के सूत्रों ने कहा कि कथित तौर पर 4.63 करोड़ रुपये प्रयास इंफो सॉल्यूशन्स, अकिंचन डेवलपर्स, मंगलयातन प्रोजेक्ट्स और इंडो मेटल इम्पेक्स प्रालि के जरिए साल 2015-16 में हासिल किए गए. उन्होंने बताया कि जैन और उनकी पत्नी की इस अवधि में इन कंपनियों में कथित तौर पर एक तिहाई हिस्सेदारी थी.

पिछले साल जून 2017 में सीबीआई ने केजरीवाल सरकार में मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ मनी लॉन्डरिंग केस में मामला दर्ज किया था. जैन पर आरोप है कि वह 4.63 करोड़ रुपये के मनी लॉन्डरिंग मामले में शामिल रहे हैं जब वह 2015-16 में सरकार कर्मचारी के तौर पर प्रयास इंफो सॉल्यूशन्स प्रा. लिमिटेड, अकिंचन डेवलपर्स प्रा. लि. और मंगलायतन प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. के साथ जुड़े थे.

जैन पर ये भी आरोप है कि 2010-12 में वह इन कंपनियों और इंडोमेटल इम्पैक्स प्रा. लिमिटेड के जरिए तथाकथित 11.78 करोड़ की मनी लॉन्डरिंग का हिस्सा रहे थे. इनकम टैक्स विभाग ने नए बेनामी संपत्ति कानून के तहत ये मामला सीबीआई को सौंपा था. हालांकि जैन ने इन आरोपों को मनगढ़ंत बताते हुए इसे राजनीतिक विद्वेश की भावना से अंजाम दी गई कार्रवाई बताया.

(भाषा इनपुट)