नई दिल्ली। राजनीतिक नेताओं से माफीनामे को लेकर अपने और विरोधियों के निशाने पर आए अरविंद केजरीवाल को लंबे समय बाद अच्छी खबर मिली है. लाभ के पद के मामले में आप के 20 विधायकों को अयोग्य ठहराने संबंधी केंद्र की अधिसूचना को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा रद्द किये जाने के फैसले ने आप और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ी राहत पहुंचाई है. केजरीवाल ने इसे सत्य की जीत बताया है. दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी आदेश का स्वागत किया. दिल्ली विधानसभा में सिसोदिया सहित आप के विभिन्न विधायकों ने इस आदेश का मेजें थपथपाकर स्वागत किया. विधायकों ने भारत माता की जय के नारे भी लगाए. Also Read - Delhi Coronavirus Update: लॉकडाउन में ढील के बाद बढ़े केस, सीएम बोले, चिंता की बात नहीं, मामले 13 हजार के पार

सत्य की जीत बताया Also Read - MCD नेताओं का आरोप: कोविड-19 से होने वाली मौतों की कम संख्या बता रही दिल्ली सरकार

केजरीवाल ने ट्वीट किया, यह सत्य की जीत है. निर्वाचित जन प्रतिनिधियों को गलत तरीके से अयोग्य ठहरा दिया गया. हाई कोर्ट ने दिल्ली के लोगों को न्याय दिया है. यह लोगों की जीत है. दिल्ली के लोगों को बधाई. बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी को बड़ी राहत देते हुए आप के20 विधायकों को लाभ के पद के मामले में अयोग्य ठहराये जाने संबंधी केंद्र की अधिसूचना निरस्त कर दी. Also Read - अम्फान तूफान: अरविंद केजरीवाल ने की पश्चिम बंगाल और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों को मदद की पेशकश

केजरीवाल के लिए गुड न्यूज 

हाई कोर्ट के इस फैसले ने केजरीवाल को बड़ी राहत दी है. अकाली नेता विक्रम मजीठिया और बीजेपी नेता-केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से लिखित माफी को लेकर केजरीवाल से पंजाब के आप विधायक नाराज हैं. इसे लेकर वह विरोधियों के निशाने पर भी हैं. केजरीवाल ने डंके की चोट पर इन दोनों नेताओं सहित कई नेताओं पर बडे़ आरोप लगाए थे. लेकिन अब वह माफी मांगते जा रहे हैं. इसी से नाराज होकर भगवंत मान ने पंजाब आप प्रमुख का पद भी छोड़ दिया था. पंजाब के आप विधायक भी इसे लेकर केजरीवाल से बेहद नाराज हैं. केजरीवाल की सफाई के बावजूद विधायकों की नाराजगी दूर नहीं हुई है.

अयोग्य विधायकों पर दोबारा हो सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से लाभ के पद पर होने की वजह से अयोग्य ठहराए गए आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों की अर्जी पर दोबारा सुनवाई करने को कहा है. इस तरह इन अयोग्य ठहराए गए विधायकों को फिलहाल राहत मिल गई है और उनकी सदस्यता बहाल हो गई है. इसके साथ ही दिल्ली की 20 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का खतरा टल गया है.

चुनाव आयोग की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने इन विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी थी. इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा था. इन विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किया गया था. आरोप था कि इन विधायकों ने लाभ का पद लेकर नियम तोड़ा है. इसी आधार पर चुनाव आयोग ने जांच के बाद इनकी सदस्यता खत्म करने का फैसला लिया था. लेकिन हाई कोर्ट ने इन विधायकों की सदस्यता बहाल कर दी.

आज सुनवाई में अदालत ने कहा कि आयोग मामले की दोबारा सुनवाई कर राष्ट्रपति को सिफारिश भेजी जाए. दालत में इन आप विधायकों ने कहा था कि आयोग के समक्ष उनको अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला. अब दोबारा इस मामले पर चुनाव आयोग सुनवाई करेगा. इन विधायकों का आरोप था कि आयोग ने उनका पक्ष जाने बिना ही सदस्यता रद्द करने का फैसला ले लिया.