नई दिल्ली। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सियासत नित नए मोड़ लेती जा रही है. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल अपने ही पूर्व विधायक की याचिका के जवाब में आम आदमी पार्टी पीएम मोदी को लेकर याचिका दाखिल करने जा रही है.आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा के सदस्य संजय सिंह ने आज कहा कि वह संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति का ब्यौरा मांगने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर करेंगे. संजय सिंह ने यह फैसला आप के असंतुष्ट विधायक और पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के संबंध में हाई कोर्ट में इसी तरह की याचिका दायर करने के बाद किया. मिश्रा ने दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री की कम उपस्थिति को लेकर आज एक जनहित याचिका दायर की.

कपिल मिश्रा से पूछे सवाल

सिंह ने मिश्रा से पूछा कि वह दिल्ली सरकार की विभिन्न परियोजनाओं के कार्यान्वयन में मोदी और उप राज्यपाल अनिल बैजल द्वारा डाले जा रहे कथित अवरोधों पर चुप क्यों हैं. उन्होंने साथ ही सवाल किया कि क्या मिश्रा का, केजरीवाल का विरोध प्रायोजित है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, नरेंद्र मोदी जी की हाज़िरी चेक कराने और उनको संसद में मौजूद रहने का आदेश प्राप्त करने के लिये मैं हाई कोर्ट में याचिका दाख़िल कर रहा हूं, दिल्ली के हर काम में रोड़ा अटकाने वाले मोदी जी के ख़िलाफ़ कपिल मिश्रा ख़ामोश क्यों रहते हैं?

‘रामदेव और RSS के साथ मिलकर मोदी को खड़ा करने वाले केजरीवाल के साथ गठबंधन नहीं’

सिंह ने एक दूसरे ट्वीट में कहा, सम्पूर्ण विपक्ष की गुहार पर भी नरेंद्र मोदी जी संसद नही आते, दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक से लेकर तमाम योजनाओं में मोदी जी और उप राज्यपाल सिर्फ़ रोक लगाते हैं लेकिन कपिल मिश्रा इन लोगों के ख़िलाफ़ एक आवाज़ नही निकालते, मिश्रा जी का विरोध प्रायोजित तो नहीं?

कपिल मिश्रा की केजरीवाल पर याचिका

इससे पहले मिश्रा ने कहा कि उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है जिसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को विधानसभा में उपस्थिति रहने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है. उन्होंने कहा कि याचिका में कहा गया कि सभी विधायकों के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य की जाए और 50 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले विधायकों, मंत्रियों और मुख्यमंत्री के लिए काम नहीं तो वेतन नहीं का प्रावधान हो. याचिका में केजरीवाल की उपस्थिति 10 प्रतिशत से भी कम होने का दावा किया गया है. अदालत ने याचिका मंजूर कर ली और उसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया.