मुंबई: 1993 के मुंबई बम धमाकों में उम्रकैद की सजा काट रहा गैंगस्टर अबू सलेम शादी करना चाहता है और इसके लिए सलेम ने पिछले महीने महाराष्ट्र सरकार से 45 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर आने की छूट मांगी थी जिसे शनिवार को महाराष्ट्र सरकार ने खारिज कर दिया. सलेम को पैरोल की याचिका को कोंकण डिविजनल कमिश्नर (डीसी) के पास भेजा गया था लेकिन डीसी ने सलेम की सुरक्षा का हवाला देते हुए तीन दिन पहले उसकी अर्जी खारिज कर दी. खबर के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार ने 2016 में पैरोल नियमों में संशोधन के तहत आतंकी गतिविधियों के आरोपियों व दोषियों को पैरोल की इजाजत नहीं दिए जाने के आधारों का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दी.Also Read - West Bengal में कोरोना प्रतिबंध 31 जनवरी तक बढ़ाए गए, शादी में 200 मेहमानों को इजाजत

Also Read - Karnataka में बढ़ते कोरोना के चलते अतिरिक्‍त प्रतिबंध, रैली, धरना, प्रदर्शन पर बैन, शादी में मेहमानों की संख्‍या सीमित

गरीब मैकेनिक से लेकर कुख्यात डॉन बनने तक अबू सलेम का सफर

गरीब मैकेनिक से लेकर कुख्यात डॉन बनने तक अबू सलेम का सफर

Also Read - अमीषा पटेल को फैसल पटेल ने खुलेआम पूछा- मुझसे शादी करोगी? गदर की सकीना को मिल गया प्यार? आखिर क्या है बात?

सलेम इस वक्त नवी मुंबई के तलोजा जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है. अपनी याचिका में सलेम ने सैयद बहार कौसर उर्फ हिना के साथ दूसरा निकाह करने की बात कही थी. यह वही महिला है जिसने 2014 में उत्तर प्रदेश में एक ट्रेन यात्रा के दौरान सलेम से शादी करने का दावा किया था. सलेम का निकाह मुंबई में पांच मई को निर्धारित है और सलेम ने उसकी गारंटी के लिए अपने दो भाइयों के नाम और विवरण भी मुहैया कराया है. सलेम ने पैरोल अवधि के दौरान अपनी होने वाली पत्नी हिना के मुंबई आवास पर अस्थाई रूप से रुकने की योजना बनाई थी.

ये भी पढ़ें- किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं है अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम और एक्ट्रेस मोनिका बेदी की अधूरी प्रेम कहानी

अपनी याचिका में अबू सलेम ने पिछले 12 सालों से अधिक समय से जेल में रहने का हवाला दिया था और कहा कि वह एक बार भी पैरोल या अवकाश पर बाहर नहीं आया है इसलिए उसे निकाह के लिए पैरोल पर बाहर जाने की इजाजत दी जानी चाहिए.

फरार माफिया डॉन दाउद इब्राहिम कास्कर के करीबी अबू सलेम को सितंबर 2017 में मुंबई में 1993 में हुए श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोटों में उसकी भूमिका के लिए दोषी करार दिया गया था और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. इन विस्फोटों में 257 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. सलेम को 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित करा कर भारत लाया गया था.