नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने यौन उत्पीड़न के आरोपी जेएनयू के प्रोफेसर अतुल कुमार जौहरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) के सदस्य पद से हटा दिया है. ईपीसीए पर वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए विभिन्न उपाय करने की जिम्मेदारी है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बीते 4 जुलाई को जारी किए गए आदेश में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के प्रोफेसर जौहरी को ईपीसीए के सदस्य पद से हटाने की घोषणा की. Also Read - IIM के असिस्‍टेंट प्रोफेसर ने की सुसाइड, फंदे पर लटकने से पहले भेजा था संदेश

बता दें कई छात्राओं द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने के बाद जौहरी को बीते मार्च में गिरफ्तार किया गया था. शिकायतें सामने आने के बाद छात्र – छात्राओं, प्रोफेसरों और महिला अधिकार संगठनों ने जौहरी की गिरफ्तारी की मांग की थी. Also Read - BHU के पूर्व प्रोफेसर की Coronavirus से हुई मौत, वाराणसी में अबतक 4 ने गंवाई जान

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल में जेएनयू की आंतरिक शिकायत समिति को जौहरी के दुर्व्यवहार की जांच पूरी करने के लिए और दो हफ्ते की मोहलत दी थी. बार – बार कोशिश करने के बाद भी जौहरी ने ईपीसीए के सदस्य पद से हटाए जाने के बाबत सवालों के जवाब नहीं दिए. जौहरी को हटाए पुष्टि करते हुए पर्यावरण मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि जौहरी पर दुर्व्यवहार का आरोप होने के कारण सदस्य पद से हटाया गया. उन्होंने कहा, हम ईपीसीए में खाली हुए पदों को भरने पर विचार कर रहे हैं. Also Read - हकलाने को लेकर प्रोफेसर ने उड़ाया स्टूडेंट का मजाक, ऋतिक ने कहा ये टीचर नहीं बददिमाग बंदर

पर्यावरण मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में यह भी कहा कि आईआईटी दिल्ली के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर मुकेश खरे को भी ईपीसीए के सदस्य पद से हटाया गया है. खरे ने संपर्क किए जाने पर बताया, ”मैंने निजी कारणों से छह महीने पहले ही इस्तीफा दे दिया था. मेरा इस्तीफा भी स्वीकार किया जा चुका है.”

मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि ऐसी खबरें हैं कि कई सदस्य ईपीसीए की बैठकों में नियमित तौर पर शामिल नहीं हो रहे. ईपीसीए के एक सदस्य ने जौहरी और खरे को प्राधिकरण के सदस्य पद से हटाने की पुष्टि करते हुए कहा कि उनकी तरफ से कोई योगदान नहीं किया जा रहा था. उन्होंने कहा, ”उनकी तरफ से कोई दिलचस्पी ही नहीं दिख रही थी.” पर्यावरण मंत्रालय ने ईपीसीए का कार्यकाल बढ़ाकर तीन अक्तूबर 2018 तक कर दिया है. इस साल चार जुलाई को ईपीसीए का दो साल का कार्यकाल पूरा हुआ था. (इनपुट- एजेंसी)