एसिड अटैक के मामलों में दोषी को 7 से 10 साल तक की हो सकती है जेल, इतने का लगेगा जुर्माना, जान लें क्या कहता है कानून

DU Acid Attack Case: आंकड़े बताते हैं कि एसिड अटैक के 80% मामलों में विक्टिम महिलाएं ही होती हैं. इनमें आरोपी कोई बाहरी नहीं, बल्कि पीड़िता की पहचान वाला, उसका प्रेमी, पति, वन साइडेड लवर, दूर का रिश्तेदार या कोई दोस्त और पड़ोसी ही होता है.

Published date india.com Published: October 27, 2025 10:43 PM IST
एसिड अटैक के मामलों में दोषी को 7 से 10 साल तक की हो सकती है जेल, इतने का लगेगा जुर्माना, जान लें क्या कहता है कानून
आंकड़े बताते हैं कि एसिड अटैक के 80% मामलों में विक्टिम महिलाएं ही होती हैं

दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक स्टूडेंट के साथ एसिड अटैक के कथित मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. लक्ष्मीबाई कॉलेज की छात्रा ने रविवार को दावा किया था कि उसपर एसिड अटैक हुआ है. अब इस मामले में लड़की के पिता को ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. उनपर आरोप है कि दोनों ने मिलकर पुरानी रंजिश में 3 लड़कों को फंसाने के लिए झूठा केस बनाया था. पिता पर साजिश रचने का आरोप है. फिलहाल पुलिस मामले में जुटी है.

तेज़ाब सिर्फ किसी के चेहरे और शरीर के बाकी अंगों को ही नहीं जलाता, बल्कि इसकी जलन उसकी पहचान, सुंदरता, आत्मविश्वास और उसके सपनों पर भी महसूस होती है. एक बार जल जाने के बाद ज़िंदगी कभी वैसी नहीं रह जाती. लेकिन, ऐसे तथाकथित मामले आने से रियल केस सामने नहीं आ पाते. आ भी पाते हैं, तो उनपर एकबार को भरोसा नहीं हो पाता.

एसिड अटैक के 80% मामलों में विक्टिम महिलाएं
आंकड़े बताते हैं कि एसिड अटैक के 80% मामलों में विक्टिम महिलाएं ही होती हैं. इनमें आरोपी कोई बाहरी नहीं, बल्कि पीड़िता की पहचान वाला, उसका प्रेमी, पति, वन साइडेड लवर, दूर का रिश्तेदार या कोई दोस्त और पड़ोसी ही होता है.

एसिड अटैक पर क्या कहता है कानून?
भारत में पहले एसिड अटैक के मामले में कोई अलग से कानूनी प्रावधान नहीं होता था. इंडियन पीनल कोड (IPC) के सेक्शन 326 के तहत ही मामलों में केस दर्ज होता था. पुराने कानून के मुताबिक एसिड अटैक के मामले में पहले 10 साल या उम्र कैद की सजा का प्रावधान था. अब एसिड अटैक के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सेक्शन 124 (1) और 124 (2)के तहत केस दर्ज होता है.

कितनी सजा का प्रावधान?

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  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सेक्शन 124 (1) के तहत अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी पुरुष या महिला पर तेजाब फेंकता है. उससे उस व्यक्ति को स्थायी या आंशिक रूप से नुकसान पहुंचता है, तो इसे गंभीर अपराध की कैटेगरी में रखा जाएगा.
  • ऐसे मामलों में अपराधी को कम से कम 10 साल की सजा और मैक्सिमम उम्रकैद भी हो सकती है. ये अपराध गैर जमानती होता है. दोषी पर उचित जुर्माने का भी प्रावधान है. जुर्माने की राशि पीड़िता को दी जाती है.
  • वहीं, BNS के सेक्शन 124 (2) के तहत जो कोई किसी व्यक्ति पर एसिड फेंकता है या फेंकने का प्रयास करता है या किसी व्यक्ति को एसिड देने की कोशिश करता है या किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल करके उस व्यक्ति को स्थायी या आंशिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, तो उसे कम से कम 5 साल की जेल से होगी.
  • अदालत चाहे तो 2 साल की अवधि बढ़ा कर कुल 7 साल के लिए आरोपी को जेल भेज सकती है.

कितना लगता है जुर्माना?
BNS की धारा 124 के तहत लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि फिक्स नहीं है. अपराधी को जुर्माने के तौर पर उचित राशि देनी पड़ती है जिससे पीड़ित के मेडिकल खर्चों को पूरा किया जा सके.

एसिड अटैक के मामलों में लागू होते हैं सुप्रीम कोर्ट के ये आदेश

  • पीड़ित को कम से कम 3 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश.
  •  मुआवजे के एक लाख की रकम 15 दिनों के अंदर देनी होगी.
  •  बाकी के 2 लाख रुपये दो महीने के अंदर ही देने होंगे.
  • राज्यों के मुख्य सचिवों को सीधे तौर पर इन आदेशों के पालन के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा.
  • 18 साल से कम उम्र के बच्चों को तेजाब नहीं बेचा जाएगा.
  • तेजाब की खरीद-बिक्री के लिए दुकानदारों को अलग से एक रजिस्टर मेंटेन करना होगा.
  • बिना आईडी कार्ड, एड्रेस प्रूफ और वजह के एसिड नहीं दिया जाएगा.
  • मेडिकल और पढ़ाई के मकसद से होलसेल में एसिड खरीदने से पहले SDM से आदेश लेना होगा.
  • तेजाब को लेकर दिए गए निर्देशों का अगर पालन नहीं होगा, तो 50 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा.
  • तेजाब को लेकर तमाम निर्देशों पर लोकल भाषा में एड भी देने का आदेश है.

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