नई दिल्लीः बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ पूरे देश को जगाने को लेकर जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों की बुधवार को प्रशंसा की और दावा किया कि यह ‘खास मकसद से लाया गया’ कानून है. ‘रांझणा’ फिल्म में उनके सह अभिनेता रहे मोहम्मद जीशान अयूब के साथ आयीं भास्कर ने विश्वविद्यालय के बाहर नये कानून के खिलाफ एक जनसभा में हिस्सा लिया.

जामिया के छात्रों ने ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘आजादी’ के नारों से नये साल का स्वागत किया. नये नागरिकता कानून के खिलाफ मुखर रहीं भास्कर ने कहा कि यह ‘खास मकसद से लाया गया’ कानून है. उन्होंने कहा, ‘‘इसमें कहीं कोई दो राय नहीं है कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर खास मकसद से लाये गये कानून हैं. उनका खास मकसद वाला एजेंडा है. यह नया कानून न केवल मुसलमानों पर बल्कि देश के संविधान और हमारे देश के मूल विचार पर भी हमला है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ जो लोग नागरिकता की परीक्षा लेने की बात करते हैं, मैं उन्हें बता देना चाहती हूं कि हमें देश के मुसलमानों पर सवाल खड़ा करने का कोई हक नहीं है. भारत के मुसलमानों ने 1947 में अग्निपरीक्षा दी तथा अब और कोई परीक्षा पास करने की जरूरत नहीं है.’’ भास्कर ने कहा कि वर्तमान स्थिति की मांग है कि हर भारतीय अपनी धार्मिक पहचान भूलकर संविधान के पक्ष में खड़ा हो जाए. उन्होंने कहा कि जो लोग इस नए कानून का समर्थन करते हैं, वे ‘देश के विरूद्ध’ हैं.

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उन्होंने कहा, ‘‘ आप देश के भले के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं, लेकिन जिन्ना के सपने को पूरा कर रहे हैं. जो लोग यहां खड़े हैं, वे गांधीजी का सपना पूरा कर रहे हैं. अभिनेत्री ने कहा कि पिछले पांच-छह सालों से ‘टुकड़े टुकड़े’ गैंग, राष्ट्रद्रोही जैसे शब्दों और सीएए एवं राष्ट्रीय नागरिक पंजी जैसे कानूनों के माध्यम से नफरत को वैध बनाया जा रहा है.

उन्होंने कहा कहा, ‘‘ लेकिन हम सभी समझ गये हैं कि क्या खेल है और हम उन्हें यह खेल नहीं खेलने देंगे.’’ उन्होंने जामिया के छात्रों और नागरिक संस्थाओं के सदस्यों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए धन्यवाद दिया, जिससे देश की ‘चेतना जाग गई.’