मुंबई, 4 मार्च | बंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को आदर्श सोसायटी घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने सीबीआई को इस मामले में आरोप-पत्र से अपना नाम हटाने की अनुमति नहीं देने के न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी। न्यायालय के फैसले के बाद अब चव्हाण के खिलाफ आदर्श सोसायटी घोटाला मामले में सुनवाई होगी। इसे महाराष्ट्र में नवनियुक्त कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष चव्हाण के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। यह भी पढ़ें–अशोक चव्हाण महाराष्ट्र कांग्रेस के नए अध्यक्ष

सीबीआई ने नवंबर 2014 में उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर इस मामले में आरोप-पत्र से चव्हाण का नाम हटाने की अनुमति मांगी थी। इसमें जांच एजेंसी ने कहा था कि उसे राज्यपाल की ओर से चव्हाण के खिलाफ मामला चलाने की अनुमति नहीं दी गई है। सीबीआई की याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति एम.एल.टहलियानी ने कहा था कि राज्यपाल ने षड्यंत्र के आरोप में उनके खिलाफ मामला चलाने की अनुमति नहीं दी है, लेकिन उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में मामला चलाया जा सकता है।

चव्हाण ने दिसंबर, 2014 में न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। सीबीआई ने अपने आरोप पत्र में चव्हाण पर षड्यंत्र करने का आरोप लगाते हुए तत्कालीन राजस्व मंत्री एवं मुख्यमंत्री के रूप में उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए थे। चव्हाण पर रक्षा कर्मियों की इस सोसायटी में आम नागरिकों को भी शामिल करने का सुझाव देने का आरोप है, ताकि उनके रिश्तेदारों को भी फ्लैट का हो सके।

सीबीआई ने इस मामले में वर्ष 2012 में चव्हाण सहित 13 अन्य के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया था। इन पर षड्यंत्र करने और अन्य गड़बड़ियां करने का आरोप है।