नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कहा है कि यदि सुप्रीम कोर्ट मीडिया नियमन के मुद्दे पर कोई फैसला लेता है तो पहले यह डिजिटल मीडिया के संबंध में लिया जाना चाहिए, क्योंकि यह बहुत तेजी से लोगों के बीच पहुंचता है और वॉट्सएप, ट्विटर तथा फेसबुक जैसी एप्लिकेशन्स के चलते किसी भी जानकारी के वायरल होने की संभावना रहती है. Also Read - Supreme Court ने कहा-बिहार विधानसभा चुनाव रोकने पर नहीं करेंगे सुनवाई, याचिका खारिज

सरकार ने शीर्ष कोर्ट को बताया कि इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया के लिए पर्याप्त रूपरेखा एवं न्यायिक निर्णय मौजूद हैं. Also Read - Delhi Riots: SC ने फेसबुक इंडिया के VP के खिलाफ 15 अक्टूबर कार्रवाई पर लगाई रोक

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Information and broadcasting ministry) की ओर से दायर जवाबी हलफनामे में कहा गया, ”अगर कोर्ट कोई फैसला लेता है तो यह पहले डिजिटल मीडिया के संदर्भ में लिया जाना चाहिए, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया से संबंधित पर्याप्त रूपरेखा एवं न्यायिक निर्णय पहले से मौजूद हैं. Also Read - CBSE Compartment Exam 2020: सुप्रीम कोर्ट ने CBSE, UGC से कहा- छात्रों का कैरियर नुकसान न हो, इसके लिए उठाएं उचित कदम

केंद्र ने हलफनामे में कहा गया, ”मुख्यधारा के मीडिया (इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट) में प्रकाशन, प्रसारण एक बार ही होता है, वहीं डिजिटल मीडिया की व्यापक पाठकों/दर्शकों तक पहुंच तेजी से होती है और वॉट्सऐप, ट्विटर और फेसबुक जैसी कई इलेक्ट्रॉनिक एप्लिकेशन्स की वजह से जानकारी के वायरल होने की भी संभावना है.”

यह हलफनामा एक लंबित मामले में दायर किया गया है, जिसमें शीर्ष न्यायालय सुदर्शन टीवी के ‘बिंदास बोल’ कार्यक्रम के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है. कार्यक्रम के प्रोमो में दावा किया गया कि चैनल ”सरकारी सेवाओं में मुस्लिमों की घुसपैठ की एक बड़ी साजिश का खुलासा करेगा.”

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने 15 सितंबर को ‘बिंदास बोल’ की दो कड़ियों के प्रसारण पर मंगलवार को दो दिन के लिए रोक लगा दी थी. कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में ये मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने वाले प्रतीत होते हैं. पीठ ने याचिका पर सुनवाई के दौरान सुझाव दिया कि इलेक्ट्रानिक मीडिया के स्व नियमन में मदद के लिए एक समिति गठित की जा सकती है.

पीठ ने कहा, ‘‘हमारी राय है कि हम पांच प्रबुद्ध नागरिकों की एक समिति गठित कर सकते हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए कतिपय मानक तैयार करेगी. हम राजनीतिक विभाजनकारी प्रकृति की नहीं चाहते और हमें ऐसे सदस्य चाहिए, जिनकी प्रतिष्ठा हो.” शीर्ष अदालत इस मामले पर आज सुनवाई करेगा.