डिंडोरी: शौक कब आदत में बदल जाती हैं, पता नहीं लगता. इसका जीता जागता उदहारण पेश कर रहे हैं मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में रहने वाले एक वकील दयाराम साहू (Dayaram Sahu). इन्हें बचपन से ही कांच खाने खाने का शौक था मगर वक्त के साथ-साथ ये शौक इनकी आदत में इस कदर शामिल हो गया है कि वो अब इसे खाए बिना नहीं रह सकते. दयाराम  पिछले 40-45 सालों से ग्लास खा रहे हैं. बचपन का ये जुनून आज भी अभी उनके सर चढ़ कर बोल रहा है.

शहपुरा निवासी वकील दयाराम बताते हैं, “यह मेरे लिए एक लत है. इस आदत से मेरे दांतों को नुकसान हुआ है. मैं दूसरों को यह सुझाव नहीं देना चाहूंगा कि यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है. मैंने अब इसे खाना कम कर दिया है.” वीडियो में आप देख सकते हैं कि दयाराम बल्ब और बॉटल के टुकड़ों को कितनी आसानी से चबाकर निगल जाते हैं. दयाराम की इस आदत से उनके घर वाले वाकिफ है और सबसे रोमांचक बात तो ये है कि उनकी पत्नी उन्हें रोकने के बजाय उनके लिए कांच की प्लेट सजाती है.

दयाराम की पत्नी ने इस मामले में कहा कि वो इनकी इस आदत से थक चुकी थी, लाख मना करने के बाद भी उन्हें कांच खाने की तलब उठती थी. वो बताती हैं कि शादी के तुरंत बाद उन्होंने अपने पति को सबसे छुप कर कांच खाते देखा था. ये देख कर वो हैरान हो गई थी. जब बहुत बार समझाने के बाद भी कुछ नहीं बदला तब उन्होंने खुद अपने पति के लिए कांच का जुगाड़ करना शुरू कर दिया.

दयाराम ने अपने इस अजीबोगरीब शौक के बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें बचपन से ही कुछ अलग करने का शौक था और इसी सिलसिले में उन्होंने कांच खाना शुरू कर दिया था. पहले तो बस ये एक शौक तक सिमित था मगर बाद में ये नशा बन गया. दयाराम ने अपनी इस हरकत के बारे में बताया कि वो एक बार में एक किलो तक कांच चबा जाते थे मगर अब दांत कमजोर होने के कारण उन्होंने कांच खाना कम कर दिया है.