नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र से कहा कि वह फ्रांस से खरीदे जा रहे 36 राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत की जानकारी उसे 10 दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में सौंपे. साथ ही कहा कि ‘रणनीतिक और गोपनीय’ सूचनाओं को सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं है. कोर्ट ने कहा कि केंद्र सौदे के फैसले की प्रक्रिया को सार्वजनिक करे, सिर्फ गोपनीय और सामरिक महत्व की सूचनाएं साझा नहीं करे. चीफ जस्‍ट‍िस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अपने आदेश में सरकार को कुछ छूट भी दी. सरकार ने सुनवाई के दौरान दलील दी थी कि कीमत से जुड़ी सूचनाएं इतनी संवेदनशील हैं कि उन्हें संसद के साथ भी साझा नहीं किया गया है. राफेल डील की केंद्रीय जांच ब्‍यूरों की मांग पर शीर्ष कोर्ट ने कहा कि पहले पहले सीबीआई को अपना घर संभाल लेने दें.” Also Read - दिल्ली-एनसीआर में रहने वालों के लिए एकीकृत व्यवस्था हो: सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा-10 दिन में हलफनामा दायर कर बताएं कि राफेल की कीमत साझा नहीं कर सकते Also Read - 'इंडिया' शब्‍द हटाकर 'भारत' या 'हिंदुस्तान' करने की पिटीशन पर SC में 2 जून को सुनवाई

पीठ ने कहा कि सरकार 10 दिन के भीतर ये सूचनाएं याचिकाकर्ताओं के साथ साझा करे. याचिकाकर्ता इसपर सात दिन के भीतर जवाब दे सकते हैं. न्यायालय ने मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख 14 नवंबर तय की है.

अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल की मौखिक दलील के बाद न्यायालय से कहा, ”यदि कीमत से जुड़ी जानकारी विशिष्ट सूचना है और आप उसे हमारे साथ साझा नहीं कर रहे हैं तो, कृपया एक हलफनामा दायर कर हमसे यह बात कहें.”

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पीठ वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और पूर्व केंद्रीय मंत्रियों अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा की याचिका सहित चार याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. उन्होंने अपनी याचिका में राफेल सौदे की जांच अदालत की निगरानी में सीबीआई से कराने की मांग की है.

न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा, ”उसके लिए आपको इंतजार करना होगा.” उन्होंने कहा, ”पहले सीबीआई को अपना घर संभाल लेने दें.” वेणुगोपाल ने विमानों की कीमत पर सूचनाएं साझा करने को लेकर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसकी कीमत संसद को भी नहीं बतायी गई. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र ने न्यायालय में जो दस्तावेज दिए हैं, वे सभी सरकारी गोपनीयता कानून के तहत आते हैं.

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न्यायमूर्ति गोगोई, न्यायमूर्ति यू. यू. ललित और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की पीठ ने कहा कि वैसी सूचनाएं जो सार्वजनिक पटल पर लाई जा सकती हैं उन्हें याचिका दायर करने वाले के साथ साझा किया जाना चाहिए.