India-Pakistan Conflict: क्यों अफगानिस्तान ने किया भारत का खुलकर समर्थन?

साल 2021 में जब अफगानिस्तान में तालिबान एक बार फिर सत्ता में लौटा तो भारत ने वहां अपना दूतावास बंद कर दिया था. उस समय यही लगा था कि भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते एक बार फिर खत्म हो गए हैं. लेकिन अब ये बात सामने आ रही है कि भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने तालिबान के विदेश मंत्री से फोन पर बात की है.

Published date india.com Updated: May 17, 2025 6:40 AM IST
India-Pakistan Conflict: क्यों अफगानिस्तान ने किया भारत का खुलकर समर्थन?

Explainer- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू होने के बाद भारत और तालिबान के रिश्तों को लेकर कई अफवाहें फैलाई गईं. पाकिस्तान ने तो ये तक दावा किया कि भारत की तरफ से अफगानिस्तान पर मिसाइल दागी गई. लेकिन झूठ के कोई पैर नहीं होते पाकिस्तान के इस दावे की पोल फौरन ही खुल गई जब ख़ुद अफग़ानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्लाह ख़वारिज़्मी ने लोगों से कहा कि पाकिस्तान के दावों में किसी भी प्रकार की कोई सच्चाई नहीं है. भारत ने अफग़ानिस्तान पर कोई मिसाइल नहीं दागी है. ऐसे में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी से फोन करके उनसे बात की तो इस बात ने सबको हैरत में डाल दिया कि क्या भारत और अफगानिस्तान के बीच रिश्तों में सुधार होगा. बता दें कि ये इतिहास में पहली बार है जब किसी भारतीय विदेश मंत्री ने तालिबान के किसी नेता से बात की हो. ऐसे में अब लोगों के मन में सवाल है कि क्या भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ‘नया फ्रंट’ खोल दिया है?

बता दें जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ और इस हमले में 26 बेगुनाह लोगों की जान चली गई तो अफगानिस्तान की तरफ से इस हमले की निंदा की गई. इस दौरान अफगानिस्तान ने खुलकर भारत के ऑपरेशन सिंदूर की समर्थन किया. जिसके बाद विदेश मंत्री एस.जयशकर ने अफगानिस्तान के नेता को धन्यवाद कहा. अगस्त 2021 में तालिबान के काबुल की सत्ता में आने के बाद से पहली बार भारत और अफगानिस्तान के बीच राजनीतिक स्तर पर बातचीत हुई है. आपको बता दें कि जब भी अफगानिस्तान का इतिहास उठाकर देखते हैं तो हमें ये बात साफ दिखती है कि अफगानिस्तान किसी भी देश के साथ ज्यादा दिन तक नहीं टिकता. कुछ समय पहले अमेरिका उसका अच्छा दोस्त हुआ करता था, लेकिन बाद में वही अमेरिका उसका दुश्मन बन गया. आज के समय में वही सबक पाकिस्तान को भी मिल रहा है.

एस. जयशंकर ने क्यों की तालिबान से बात?

एक समय था जब भारत और अफगानिस्तान एक ही साम्राज्य का हिस्सा हुआ करते थे. दोनों के रिश्तों तब अच्छे हुआ करते थे. लेकिन कुछ साल बाद दोनों के रिश्तों में कई उतार चढ़ाव आए. फिर इनके रिश्ते कभी अच्छे तो कभी तनावपूर्ण बने रहे. साल 1999 में जब इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट को पाकिस्तानी आतंकवादियों ने हाइजैक किया उस समय भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते पर सबसे बड़ी लगी थी.

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि एस जयशंकर तालिबान से बात क्यों कर रहे हैं? हालांकि इस सवाल का सीधा जवाब है चाणक्य की मंडल थ्योरी- चाणक्य की मंडल थ्योरी के मुताबिक, अगर दो राज्यों के बीच कोई तीसरा राज्य है, तो वो एक-दूसरे के दोस्त हो सकते हैं क्योंकि उनके दुश्मन एक जैसे होते हैं. आसान भाषा में कहें तो – दुश्मन का दुश्मन, दोस्त होता है.

बता दें कि भारत और अफगानिस्तान का हमेशा से ही एक साझा इतिहास रहा है. इंडो-आर्यन माइग्रेशन थ्योरी के मुताबिक, गांधार एक ट्रांजिट पॉइंट यानी रास्ता था. , जो इन दोनों देशों के साझा इतिहास की ओर इशारा करते हैं. मौर्यकाल से लेकर कई सदियों तक, आज के अफगानिस्तान का एक बड़ा हिस्सा भारत के साम्राज्य में शामिल रहा था. चलिए अब जानते हैं कि कैसे भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों में दरार आईं.

भारत अफगानिस्तान के रिश्ते सबसे खराब कब हुए?

भारत के साथ सदियों से चले आ रहे रिश्ते का पक्का वाला ब्रेकअप 18वीं सदी में दुर्रानी साम्राज्य के जमाने में हुआ. वहीं ब्रिटिशों ने अफगानिस्तान को ‘ग्रेट गेम’ में रूस के खिलाफ एक बफर स्टेट बना दिया – जहां दोनों बड़ी ताकतों के बीच जोर आजमाइश चलती रही. उस समय रूस से भारत के बहुत अच्छे संबंध थे इसलिए भारत भी अफगानिस्तान के साथ नहीं खड़ा हुआ. हालांकि साल 1973 में जब अफगानिस्तान एक गणराज्य बना, तो भारत ने एक दोस्त की तरह उसे फौरन मान्यता दे दी. लेकिन ये दोस्ती 1996 तक चली.

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पर जैसे ही तालिबान का उदय हुआ एक बार फिर इस दोस्ती ने दुश्मनी का रूप ले लिया. क्योंकि तालिबान एक कट्टरपंथी लड़ाकू संगठन है. जिसकी जड़ें पाकिस्तान में थीं. साल 1996 में वो अफगानिस्तान में सिविल वॉर जीतकर सत्ता में आया. भारत के पास इस संगठन से दूरी बरतने की कई कारण थे जैसे- पाकिस्तान से तालिबान को समर्थन मिल रहा था, तालिबान की कट्टर सोच, और मानव अधिकारों का उल्लंघन. यही वजहें थी कि भारत ने तालिबान की सरकार को कभी मान्यता नहीं दी.

भारत के प्लेन को हाइजैक करके ले जाया गया कंधार

साल 1999 के दिसंबर महीने में काठमांडू से दिल्ली आ रहे एक भारतीय विमान को पाकिस्तानी आतंकवादियों ने हाइजैक कर लिया था. जिसे बाद में अफगानिस्तान के कंधार में ले जाया गया. जिसके बाद भारत को तीन खतरनाक आतंकियों को छोड़ना पड़ा, ताकि यात्रियों को सुरक्षित वापस लाया जा सके. यही वो पल था जब भारत-अफगानिस्तान के रिश्ते सबसे खराब और निचले स्तर पर पहुंच गए थे.

इस रिश्ते में फिर एक चिंगारी नजर आई

लेकिन 8 जनवरी 2025 को पहली बार ये बात ऑफिशियल सामने आई कि भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री से मुलाकात की. और, अब एस. जयशंकर ने भी तालिबान के विदेश मंत्री से बात कर ली है. यानी काबुल तक के इस टेढ़े-मेढ़े रास्ते में एक नया मोड़ आ चुका है.

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