मणिपुर चुनाव में इस बार सबसे बड़ा मुद्दा आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (AFSPA) है। मणिपुर के अनेक संगठन आरोप लगाते रहे हैं कि सेना अफस्पा कानून की आड़ में बेगुनाहों का कत्ल करती रही है। अफस्पा के विरोध में मणिपुर की मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला चानू करीब 16 सालों तक भूख हड़ताल कर अफस्पा हटाने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नक्शेकदम पर चलती रहीं।

अफस्पा खत्म करने के लिए चुनाव लड़ रही हैं इरोम
इरोम शर्मिला ने 2016 में अनशन तोड़ा और राजनीति में कदम रखने का फैसला किया। इरोम शर्मिला मणिपुर विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद की प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं। आयरन लेडी के नाम से मशहूर इरोम, थउबल विधानसभा सीट से कांग्रेस नेता और राज्य के मुख्यमंत्री ओकरम इबोबी सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। इरोम ने थाउबल विधानसभा सीट से पर्चा दाखिल किया है। मणिपुर में इरोम का एक मात्र एजेंडा अफस्पा हटाना है। अगर वह चुनाव जीत जाती हैं तो अफस्पा जैसे सख्त कानून, जिसके लिए वह 16 सालों तक अनशन पर रही उसको खत्म कर देंगी।

कांग्रेस जीती तो राज्य में लागू रहेगा अफस्पा
मणिपुर में पिछले 15 सालों से कांग्रेस की ही सरकार थी, लेकिन अफस्पा के मामले में कांग्रेस सरकार ने कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इबोबी सिंह के 15 साल के कार्यकाल के इतिहास में कई एनकाउंटरों हुए, जिन पर संदेह है। इन पंद्रह सालों में राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठे। जाहिर है अगर एक बार फिर राज्य में कांग्रेस वापसी करती है तो अफ्सपा लागू रहेगा।

बीजेपी भी है अफस्पा के पक्ष में
अगर मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती है तो अफस्पा राज्य से कभी नहीं हटेगा। बीजेपी हमेशा से अफस्पा के पक्ष में रही है। जम्मू कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी की साझा सरकार है। वहां भी दोनों पार्टियों ने मिलकर अफस्पा पर नरम रुख अख्तियार किया है। अगर मणिपुर में भी बीजेपी की गठबंधन सरकार बनती है या सरकार में इरोम शर्मिला की भूमिका हुई तो अफस्पा पर विचार हो सकता है।

क्या है अफस्पा?
अफस्पा काफी सख्त कानून है। पूर्वोत्तर के राज्यों में इसे (1958) में लागू किया गया और बाद में (1990) में जम्मू-कश्मीर में भी इसे लागू कर दिया गया। अफस्पा की धारा 4 (a) के तहत सेना को बिना वारंट के तलाशी, गिरफ्तारी तथा ज़रूरत पड़ने पर शक्ति का इस्तेमाल करने की इजाज़त है और ज़रूरत पड़ी तो सेना संदिग्ध व्यक्ति को गोली भी मार सकती है। इसीलिये मणिपुर में सेना को मिले असीमित अधिकारों का विरोध हो रहा है। इसके तहत केंद्र व राज्य सरकार किसी भी क्षेत्र को गड़बड़ी वाला क्षेत्र घोषित कर सकती हैं।

किन-किन राज्‍यों में लागू अफस्‍पा
असम, जम्‍मू कश्‍मीर, नागालैंड और इंफाल म्‍यूनिसिपल इलाके को छोड़कर पूरे मणिपुर में यह कानून लागू है। वहीं अरुणाचल प्रदेश के तिराप, छांगलांग और लांगडिंग जिले और असम से लगी सीमा पर यह कानून लागू है। वहीं मेघालय में भी सिर्फ असम से लगती सीमा पर यह कानून लागू है।