अमरावती/कोलकाता. आंध प्रदेश और पश्चिम बंगाल की सरकारों ने सीबीआई को अपने अपने राज्य में छापे मारने तथा जांच करने के लिए दी गई ‘सामान्य रजामंदी’ वापस ले ली है. वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के कारण राज्यों का उन पर से विश्वास कम हो रहा है. हालांकि भाजपा ने इसे ‘भ्रष्ट दलों द्वारा अपने हितों के बचाव के लिए अधिकारों की स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण कवायद’ करार दिया. Also Read - आंध्र प्रदेश में CoronaVirus के 160 मामलों में से 140 तबलीगी जमात इवेंट के कारण

सीबीआई को अब इन राज्यों में अदालती आदेश वाले मामलों तथा केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ मामलों को छोड़कर शेष सभी में किसी तरह की जांच के लिए संबंधित राज्य सरकार की अनुमति लेनी होगी. आंध्र प्रदेश में तेलुगूदेशम पार्टी की सरकार है जिसके मुखिया चंद्रबाबू नायडू हैं वहीं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी का शासन है. दोनों ही उन नेताओं में शामिल हैं जो 2019 के लोकसभा चुनावों में एकजुट होकर भाजपा से मुकाबले के लिए विपक्षी दलों का महागठबंधन बनाने के लिए प्रयासरत हैं. आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री (गृह) एन चिना राजप्पा ने संवाददाताओं से कहा कि सहमति वापसी लेने की वजह देश की प्रमुख जांच एजेंसी के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोप हैं. Also Read - VIDEO: कोरोना संकट के बीच दिखा ये नजारा, विधायक ने खुलेआम एएसआई के छुए पैर

ये है नियम
ताजा सरकारी आदेश (जीओ) के अनुसार, दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम, 1946 की धारा छह के तहत दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, सरकार दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान के सभी सदस्यों को आंध प्रदेश राज्य में इस कानून के तहत शक्तियों तथा क्षेत्राधिकार के इस्तेमाल हेतु दी गई सामान्य रजामंदी वापस लेती है. प्रधान सचिव (गृह) ए आर अनुराधा द्वारा आठ नवंबर को इस संबंध में जारी एक ‘गोपनीय’ सरकारी आदेश गुरुवार की रात ‘‘लीक’’ हो गया. Also Read - निजामुद्दीन मरकज से आंध्र प्रदेश लौटे सभी 43 लोग COVID19 से संक्रमित मिले

राजप्पा ने ये कहा
राजप्पा ने कहा, हमें सीबीआई में भरोसा है लेकिन इसके शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ हाल में लगे आरोपों के कारण हमने सामान्य रजामंदी वापस ले ली। यानी सीबीआई को हर मामले की जांच के लिए राज्य सरकार की अनुमति हासिल करनी होगी.उप मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वकीलों और जानकारों की सलाह पर फैसला लिया गया है. इसके बाद ही शुक्रवार शाम को पश्चिम बंगाल सरकार ने भी सीबीआई को अपने राज्य में छापे मारने और जांच करने के लिए दी गयी सामान्य रजामंदी वापस ले ली.

ममता ने ये कहा
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा, चंद्रबाबू नायडू ने बिल्कुल सही किया है। भाजपा अपने राजनीतिक हितों के लिए सीबीआई और अन्य एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है. भाजपा ने नायडू सरकार के फैसले को भ्रष्टाचार, वित्तीय गड़बड़ियों तथा अन्य आपराधिक कृत्यों को बचाने की दुर्भावनापूर्ण कवायद कहा.

बीजेपी ने दी प्रतिक्रिया
भाजपा के राज्यसभा सदस्य जीवीएल नरसिंहा राव ने एक बयान में कहा, राज्य सरकार ने सीबीआई में हालिया घटनाक्रम का हवाला कमजोर बहाने के तौर पर किया है और उसकी मंशा भ्रष्टों को बचाने एवं भ्रष्टाचार तथा आपराधिक कृत्यों में शामिल लोगों और संगठनों को राजनीतिक संरक्षण देने की है. कार्यपालिका की शक्तियों का इस्तेमाल व्यापक जनहित में होना चाहिए. जब कोई नया राजनीतिक गठजोड़ अपने प्रमुख एजेंडे के तौर पर भ्रष्टों को संरक्षण दे तो जनता ऐसे स्वार्थी राजनीतिक दलों को दंडित करेगी. उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को सभी राजनीतिक मंचों पर उठाएगी.