नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ए के सीकरी ने एम नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से खुद को गुरुवार को अलग कर लिया. न्यायमूर्ति ए के सीकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध की है. दूसरी पीठ अब इस मामले की सुनवाई करेगी. जैसे ही मामला सुनवाई के लिए आया न्यायमूर्ति सीकरी ने गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे को बताया कि वह इस मामले की सुनवाई नहीं करना चाहते और खुद को इससे अलग कर रहे हैं. उन्होंने कहा, आप मेरी स्थिति समझते हैं, मैं इस मामले पर सुनवाई नहीं कर सकता. गौरतलब है कि न्यायमूर्ति सीकरी सीबीआई निदेशक अलोक वर्मा को पद से हटाने वाली उच्च अधिकार प्राप्त समिति का हिस्सा थे.

इससे पहले प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो के अंतरिम निदेशक के रूप में एम नागेश्वर राव की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. प्रधान न्यायाधीश ने कहा था कि वह जांच ब्यूरो के नये निदेशक का चयन करने वाली उच्च स्तरीय समिति की 24 जनवरी को हो रही बैठक में हिस्सा लेंगे, इसलिए इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर रहे हैं.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति केन्द्रीय जांच ब्यूरो के नए निदेशक का चयन करेगी. इस समिति के अन्य सदस्यों में प्रधान न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित शीर्ष अदालत के न्यायाधीश और सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता शामिल हैं.

शीर्ष अदालत ने सीवीसी और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के आदेशों को निरस्त कर आठ जनवरी को आलोक वर्मा को जांच ब्यूरो के निदेशक पद पर बहाल करते हुये उनके अधिकारों को सीमित कर दिया था. हालांकि, न्यायालय ने कहा था कि जांच ब्यूरो के निदेशक का चयन करने वाली समिति एक सप्ताह के भीतर इस प्रकरण पर जांच करे क्योंकि सीवीसी वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही है.

इस निर्णय के बाद ही उच्च स्तरीय समिति ने दो दिन की बैठक के दौरान आलोक कुमार वर्मा को जांच ब्यूरो के निदेशक पद से हटाने का निर्णय किया और 10 जनवरी को उन्हें हटाने के बाद से जांच ब्यूरो के निदेशक का पद रिक्त है. सरकार ने अंतरिम व्यवस्था के रूप में एम नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक नियुक्त कर रखा है.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष जांच ब्यूरो के अंतरिम निदेशक के रूप में नागेश्वर राव की नियुक्ति के खिलाफ गैर सरकारी संगठन ‘कामन काज’ की जनहित याचिका सूचीबद्ध थी. इसी दौरान प्रधान न्यायाधीश ने इस याचिका की सुनवाई से हटने के निर्णय की जानकारी देते हुये कहा कि यह प्रकरण किसी अन्य उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होगा.