कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक (CWC Meet) के बाद पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) से फोन पर बात की थी. न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है. ऐसा माना जा रहा है कि नेतृत्व में बदलाव की मांग वाले ‘लेटर बम’ पर कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में हुए घमासान के बाद पार्टी डैमेज कंट्रोल में जुट गई है. सूत्रों ने बताया कि सोनिया गांधी ने बैठक के बाद गुलाम नबी आजाद से फोन पर बात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी सभी शिकायतें सुनी जाएंगी. Also Read - चिकित्सा जांच के बाद स्वदेश लौटीं सोनिया गांधी, राहुल भी वापस आए

CWC की मीटिंग के बाद कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, मुकुल वासनिक, आनंद शर्मा और शशि थरूर सहित कुछ कांग्रेसी नेताओं ने गुलाम नबी आजाद के आवास पर बैठक की थी. सीडब्ल्यूसी की बैठक में आजाद सहित 20 से अधिक वरिष्ठ नेताओं के एक पत्र की पृष्ठभूमि में ‘पूर्णकालिक’ सक्रिय नेतृत्व, सुधारों को व्यापक बनाने के साथ-साथ सीडब्ल्यूसी के चुनाव की मांग की गई थी. Also Read - कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी हेल्‍थ चेक-अप के सिलसिले में गईं विदेश, राहुल गांधी भी हैं साथ

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि अगर CWC के बाहर कुछ सहयोगियों ने उन पर ‘भाजपा के साथ मिलीभगत’ का पत्र लिखा है और अगर वे लोग आरोप साबित कर सकते हैं तो वह इस्तीफा दे देंगे.’ आजाद ने ट्वीट कर कहा था, ‘मीडिया का एक वर्ग गलत तरीके से यह आरोप लगा रहा है कि CWC में मैंने राहुल गांधी को यह साबित करने के लिए कहा था कि हमारे द्वारा लिखा गया पत्र ‘बीजेपी के साथ मिलीभगत’ है. मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि राहुल गांधी ने न तो CWC और न ही उसके बाहर कहा कि बीजेपी के कहने पर पत्र लिखा गया है.

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘मैंने यह कहा था कि कांग्रेस के कुछ नेता आरोप लगा रहे हैं कि हमने BJP की ओर से ऐसी चिट्ठी लिखी है. इसलिए मैंने बोला था कि ये काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ साथी (सीडब्लूसी से बाहर) इस प्रकार के आरोप लगा रहे हैं, अगर वो ये साबित कर देंगे तो मैं इस्तीफा दे दूंगा.’

बता दें कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से एक दिन पहले एक पार्टी के 23 वरिष्ठ नेताओं द्वारा लिखा लेटर सामने आया था, जिसमें नेतृत्व में बदलाव को लेकर बात की गई थी. इसे लेकर बैठक में बवाल भी हुआ था. इसके बाद कार्यसमिति की बैठक में कई नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई थी कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को चार व्यक्तियों की एक समिति द्वारा सहायता प्रदान की जाए, ताकि पहले की तरफ जब वह विदेश में इलाज कराने जाएं तो इस पैनल के माध्यम से पार्टी के साथ व्यापक रूप से जुड़ी रहें.