नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में क्या आतंकियों के बीच खुली जंग छिड़ने जा रही है? क्या हिज्बुल मुजाहिदीन के चीफ को लेकर आतंकियों के बीच मारकाट मच सकती है? हिज्बुल चीफ सब्जार अहमद बट को ढेर किए जाने के बाद ऐसे ही सवाल उठ रहे हैं. सब्जार की मौत के बाद अब नए चीफ को लेकर आतंकियों में बड़ी जंग छिड़ सकती है.

बुरहान के बाद सब्जार को मिली कमान 

2015 में हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी को एनकाउंटर में ढेर किए जाने के बाद सब्जार अहमद को इसकी कमान दी गई थी. सब्जार भी वानी की तरह की युवाओं को लुभानेा के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता था. हिज्बुल के लिए संकट की बात ये भी है कि अब इस आतंकी ग्रुप में कोई प्रभावी चेहरा नहीं रहा. अधिकतर आतंकी ढेर किए जा चुके हैं. पुराना आतंकी जाकिर मूसा पहले ही हिज्बुल से अपनी राह अलग कर चुका है. इसने इस आतंकी घटना का सिरदर्द और बढ़ा दिया है.

रियाज नायको दौड़ में सबसे आगे

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हिज्बुल में अब कुछ ही चेहरे ऐसे बचे हैं जो सब्जार की जगह ले सकते हैं. इनमें सबसे पुराना कमांडर है रियाज नायको. कहा जा रहा है कि अब उसे हिज्बुल का नया कमांडर बनाया जा सकता है. लेकिन खबरों की मानों तो इसमें पेंच ये है कि 2015 में लश्कर ए तैयबा छोड़कर हिज्बुल में आने वाले सद्दाम पड्डर और यासीन इटू भी चीफ बनने की चाहत रखते हैं.

हालांकि सबसे मजबूत दावा रियाज का ही है. 30 साल का रियाज हिज्बुल में तभी से शामिल है जब से बुरहान वानी ने इसका दामन थामा था. सब्जार के मारे जाने और जाकिर मूसा के विद्रोह के बाद रियाज को भी कमांडर बनाए जाने की खबर थी. लेकिन नए दावेदारों के कारण इसमें पेंच फंस गया है.

सद्दाम भी दावेदारों में

सूत्रों के मुताबिक 25 साल का सद्दाम पहले भी हिज्बुल कमांडर बनने की दौड़ में था लेकिन तब जाकिर मूसा उसके आड़े आ गया था. शोपियां के हेफ गांव से संबंध रखने वाले सद्दाम ने 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़कर पिता के साथ सेब के कारोबार में लग गया था. बाद में उसने हथियार उठा लिया और लश्कर में शामिल हो गया. 2014 तक वह लश्कर में रहा और इस दौरान अब्बास शेख, वसीम शेख, फारुक बिजरान और राहुल आमीन डार जैसे आतंकी उसके साथी थे.

अब मारकाट के आसार

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस समय दक्षिणी कश्मीर में 200 आतंकी सक्रिय हैं, जिनमें से 110 आतंकी स्थानीय हैं. पुलिस के मुताबिक, पुलवामा जिले में हिजबुल से 21 आतंकी जुड़े हुए हैं. बताया जाता है कि आठ लश्कर के कमांडर अबु दुजाना के साथ हैं. एक वक्त रियाज नायको भी दुजाना ग्रुप का सदस्य था. बाद में वही हिज्बुल में शामिल हो गया और उसने बुरहान वानी के अंडर काम करना शुरू कर दिया. 2015 में बुरहान वानी की मौत के बाद सब्जार को हिज्बुल की कमान मिली थी. अब सब्जार की मौत के बाद रियाज का नाम ही सबसे आगे है. लेकिन सद्दाम पड्डर और यासीन इटू ने दावेदारी पेश कर आने वाले वक्त में हिज्बुल में मारकाट के आसार बढ़ा दिए है.

जाकिर मूसा बना सकता है नया संगठन

हिज्बुल के प्रमुख आतंकियों के मारे जाने के बाद लश्कर और प्रभावी रूप से आतंकियों की कमान अपने हाथ ले सकता है. एक के बाद एक बड़े आतंकियों के मारे जाने या साथ छोड़ देने के बाद लश्कर के लिए अपना जाल फैसला और आसान हो सकता है. इसके अलावा जाकिर मूसा भी अपना अलग संगठन बनाकर आतंक को नई हवा दे सकता है. वह पहले ही अपनी मंशा साफ कर हिज्बुल का साथ छोड़ चुका है. उसने कश्मीर में कथित आजादी की जंग को इस्लाम की जंग देने की कोशिश की है. अलगाववादी नेताओं को चुप न रहने पर सिर काट देने की धमकी से उसके इरादे साफ जाहिर होते हैं.