मुंबई: कोरोना वायरस (Corona Virus) के प्रसार को रोकने के लिए लागू देशव्यापी लॉकडाउन को तीन मई तक बढ़ाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) द्वारा घोषणा के बाद मजदूर इतना परेशान हुए कि सड़कों पर उतर आए. सैकड़ों मजदूरों ने बांद्रा में सड़क पर हंगामा करना शुरू कर दिया. मजदूरों की मांग की थी कि उन्हें उनके घरों को भेजने के लिए परिवहन की व्यवस्था की जाए. ये सभी प्रवासी मजदूर दिहाड़ी मजदूर हैं. सूचना है कि इस दौरान पुलिस ने उन पर बल प्रयोग भी कर दिया. इसे लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने सीएम उद्धव ठाकरे से बात कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए. Also Read - बंगाल में दुर्गा पूजा के मौके पर बोले पीएम मोदी- आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प से ‘सोनार बांग्ला’ के संकल्प को पूरा करना है

कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए पिछले महीने लॉकडाउन (Lockdown) लागू होने के बाद से दिहाड़ी मजदूर बेरोजगार हो गए हैं. इससे उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. हालाँकि अधिकारियों और गैर-सरकारी संगठनों ने उनके भोजन की व्यवस्था की है, लेकिन उनमें से अधिकतर पाबंदियों के चलते हो रही दिक्कतों के चलते अपने मूल स्थानों को वापस जाना चाहते हैं. Also Read - भाजपा के 'चाणक्य' गृहमंत्री अमित शाह को पीएम मोदी ने दी जन्मदिन की बधाई, कही ये बात

पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार करीब 1000 दिहाड़ी मजदूर रेलवे स्टेशन के पास मुंबई उपनगरीय क्षेत्र बांद्रा (पश्चिम) बस डिपो पर एकत्रित हो गए और सड़क पर बैठ गए. दिहाड़ी मजदूर पास के पटेल नगरी इलाके में झुग्गी बस्तियों में किराए पर रहते हैं, वे परिवहन सुविधा की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं ताकि वे अपने मूल नगरों और गांवों को वापस जा सकें. वे मूल रूप से पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के रहने वाले हैं. Also Read - नवरात्रि 2020 पर बंगाल के लोगों से आज जुड़ेंगे PM मोदी, 'पुजोर शुभेच्छा' के जरिए जनता को देंगे खास संदेश

एक मजदूर ने अपना नाम बताए बिना कहा कि एनजीओ और स्थानीय निवासी प्रवासी मजदूरों को भोजन मुहैया करा रहे हैं लेकिन वे लॉकडाउन के दौरान अपने मूल राज्यों को वापस जाना चाहते हैं क्योंकि बंद से उनकी आजीविका बुरी तरह से प्रभावित हुई है. उसने कहा, ‘‘अब, हम भोजन नहीं चाहते हैं, हम अपने मूल स्थान वापस जाना चाहते हैं, हम (लॉकडाउन बढ़ाने की) घोषणा से खुश नहीं हैं.’’

पश्चिम बंगाल के मालदा के रहने वाले असदुल्लाह शेख ने कहा, ‘‘हमने लॉकडाउन के पहले चरण में अपनी बचत पहले ही खर्च कर दी है. अब हमारे पास खाने को कुछ नहीं है, हम केवल अपने मूल स्थान वापस जाना चाहते हैं, सरकार को हमारे लिए व्यवस्था करनी चाहिए.’’ एक अन्य मजदूर, अब्दुल कय्यूम ने कहा, ‘‘मैं पिछले कई वर्षों से मुंबई में हूं, लेकिन ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी. सरकार को हमें यहां से हमारे मूल स्थान पर भेजने के लिए ट्रेनें शुरू करनी चाहिए.’’ अधिकारी ने कहा कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए विरोध स्थल पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है. अन्य पुलिस थानों से कर्मियों को बुलाया गया है.