नई दिल्ली: देश के सबसे विवादित और सबसे चर्चित मामले अयोध्या विवाद का फैसला सुनाने के बाद चार और भी बेहद अहम मुद्दे हैं, जिनका सुप्रीम कोर्ट को न सिर्फ फैसला सुनाना है, बल्कि नजीर भी पेश करनी है. अयोध्या जैसे बहुचर्चित मामले के ख़त्म होने के बाद ये मुद्दे भी देश और लोगों के लिए बेहद अहम हैं. इन अहम मुद्दों पर फैसला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (प्रधान न्यायाधीश) रंजन गोगोई को 17 नवंबर को होने वाले अपने रिटायरमेंट से पहले देना है. यानी पांच दिनों के अंदर देश कुछ और ऐतिहासिक मुद्दों पर फैसलों को देखने के लिए तैयार है.

अयोध्या भूमि विवाद मामले पर ऐतिहासिक फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ एक हफ्ते के भीतर चार अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर फैसला सुनाएगी. पीठ राजनीतिक रूप से संवेदनशील एक अन्य मामले में फैसला सुनाएगी.

अयोध्या फैसले पर वरिष्ठ न्यायाधीशों ने की रंजन गोगोई की जमकर तारीफ

एक बड़ा मामला राफेल को लेकर है. इसमें 14 दिसंबर 2018 के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गयी है, जिसके तहत मोदी सरकार को राफेल लड़ाकू विमान की खरीदारी में क्लीन चिट दे दी गयी थी. राफेल मुद्दे को लेकर कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर था. कांग्रेस ने 2019 लोकसभा का पूरा चुनाव ही राफेल में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाकर लड़ा था. मोदी सरकार की साख भी इस मामले से जुड़ी हुई है. देश बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसे लेकर क्या होता है.

राफेल मामले में शीर्ष अदालत पूर्व केंद्रीय मंत्रियों- यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी तथा कार्यकर्ता-वकील प्रशांत भूषण समेत कुछ अन्य की अर्जी पर सुनवाई करेगी. इन याचिकाओं में पिछले साल के 14 दिसंबर के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई है जिसमें फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट से 36 लड़ाकू विमान खरीदने के केंद्र के राफेल सौदे को क्लीन चिट दी गई थी.

इसके साथ ही एक अन्य मामला राहुल गांधी से जुड़ा है. राहुल गांधी ने राफेल मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ ‘चौकीदार चोर है’ का नारा दिया था. इस टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी की सांसद मीनाक्षी लेखी ने अवमानना का मुकदमा दर्ज कराया था. सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में भी फैसला सुनाया जाएगा.

इसके अलावा न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ केरल में सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के शीर्ष न्यायालय के फैसले पर पुनर्विचार को लेकर याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाएगी.

सूचना का अधिकार कानून के दायरे में प्रधान न्यायाधीश का पद आता है या नहीं इस संबंध में भी फैसला आना है. न्यायमूर्ति गोगोई की पीठ ने चार अप्रैल को इस संबंध में याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली थी.