पणजी. कर्नाटक में सियासी संकट का सामना कर रही कांग्रेस पार्टी को अब गोवा में भी ऐसा ही दुख झेलना पड़ रहा है. गोवा में भी कांग्रेस के लिए सियासी संकट गहरा गया है. दरअसल, बुधवार को गोवा में एक बहुत बड़े और अप्रत्याशित राजनैतिक घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस में जबर्दस्त सेंध लगाते हुए उसे दो फाड़ कर दिया. भाजपा ने विधानसभा के नेता विपक्ष चंद्रकांत कावलेकर के नेतृत्व में कांग्रेस के दस विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया. कांग्रेस के राज्य में 15 विधायक थे. अब पांच बचे हैं.
पूर्व कांग्रेस नेता चंद्रकांत कावलेकर ने पार्टी की राज्य इकाई में टूट के लिए गोवा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद और विपक्षी विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्य नहीं होने को जिम्मेदार बताया. इस हतप्रभ कर देने वाले घटनाक्रम के बाद अब राज्य विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या 17 से बढ़कर 27 हो गई है. जो दस विधायक कांग्रेस से अलग हुए हैं उनमें चंद्रकांत कावलेकर, इसीडोर फर्नाडिस, फ्रांसिस सिलवेरा, फिलिप नेरी रोड्रिगेज, जेनिफर एवं अतानासियो मोनसेराते, अंतोनियो फर्नाडिस, नीलकंठ हालारंकर, कलाफासियो डॉयस और विल्फ्रेड डी सा शामिल हैं.
Goa Assembly Speaker Rajesh Patnekar: Today 10 Congress MLAs gave one letter to me that they are merging with BJP. The second letter was given by Goa CM Pramod Sawant that strength of BJP has been changed. I have accepted both the letters. pic.twitter.com/UUeNQrRLWZ
कांग्रेस के पास अब पांच विधायक बचे हैं. इनमें दिगंबर कामत, लुजिन्हो फलेरियो, रवि नाइक, प्रताप सिंह राणे (यह सभी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं) और अलेक्सो रेजिनाल्डो शामिल हैं. कांग्रेस से अलग हुए विधायकों के इस समूह के भाजपा में शामिल होने पर विधानसभा अध्यक्ष ने बुधवार को देर शाम मुहर लगा दी. इसके बाद राज्य के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने राज्य विधानसभा परिसर में संवाददाताओं से कहा, “कांग्रेस के दस विधायकों ने, जो कांग्रेस विधायक दल का दो तिहाई हिस्सा हैं, नेता विपक्ष चंद्रकांत कावलेकर के नेतृत्व में अपनी पार्टी को छोड़ दिया और आज (बुधवार को) अपना विलय भाजपा में कर दिया. भाजपा विधायकों की संख्या अब 17 से बढ़कर 27 हो गई है.”
सावंत ने बताया कि इस विलय को पार्टी हाईकमान की स्वीकृति हासिल है. यह सभी दस विधायक पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मिलने दिल्ली जा सकते हैं. कावलेकर ने भी राज्य विधानसभा परिसर में संवाददाताओं से बात की. उन्होंने कहा कि इस फैसले की एक वजह पार्टी के राज्य के नेताओं के बीच के मतभेद भी हैं जिसकी वजह से राज्य में कांग्रेस सरकार बनाने के लिए दावा पेश करने की स्थिति में नहीं आ सकी. यह पूछने पर कि क्या यह अजीब नहीं है कि नेता विपक्ष सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हो जाए, कावलेकर ने कहा, “नेता विपक्ष होने के साथ साथ, मैं एक क्षेत्र का विधायक भी हूं और यह मेरा दायित्व है कि मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र की देखभाल करूं.”
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