नई दिल्ली: 2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की करारी हार के तीन साल बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बिहार के दौरे पर जा रहे हैं. विधानसभा में बीजेपी की हार के बाद यह उनकी पहली अधिकारिक यात्रा है. बताया जा रहा है कि शाह 10 हजार से ज्यादा शक्ति केंद्र प्रमुखों को संबोधित करेंगे. 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए वह राज्य में बीजेपी की जीत सुनिश्चित करने के लिए स्ट्रेटजी तैयार करेंगे. Also Read - Bihar Flood: बिहार में बाढ़ से जनजीवन प्रभावित, इन जिलों में हालत खराब

कर्नाटक और गुजरात के विधानसभा चुनाव में वोटरों को बीजेपी के पक्ष में करने के लिए शाह ने शक्तिकेंद्र के प्रमुखों को संबोधित किया था. इसका पार्टी को फायदा भी मिला था. बिहार के एक बीजेपी के नेता ने बताया कि राज्य में 63 हजार वोटिंग बूथ हैं. इनमें से 51 हजार बूथ का डाटा पार्टी ने कलेक्ट कर लिया है. गुरुवार को राज्य के नेताओं के साथ होने वाली अमित शाह की मीटिंग में इस डाटा को रखा जाएगा. Also Read - बिहार में बाढ़ से स्थिति बदहाल, बुरा है इन 16 जिलों का हाल, 75 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित

राज्य में बीजेपी आक्रामक तरीके से आगे बढ़ेगी इसके लिए शाह 45 आईटी और सोशल मीडिया टीम के प्रमुखों के साथ मीटिंग करेंगे. बीजेपी फेसबुक और वट्सऐप के जरीए वोटरों को लुभाने की कोशिश करेगी. Also Read - भीम आर्मी बड़ा ऐलान, बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगा संगठन

बीजेपी खासकर उन बूथों के डाटा जमा कर रही है जहां मुस्लिम और यादव वोटर ज्यादा हैं. 2015 में मिली करारी हार के बाद बीजेपी ने इस तरह के बूथ पर पार्टी के पक्ष में वोटिंग के लिए बड़ा प्लान तैयार किया है. पन्ना प्रमुखों से लेकर शक्ति केंद्र की स्थापना इसी की दिशा में उठाया गया कदम है.

अमित शाह बीजेपी के उन नेताओं से अलग से चर्चा करेंगे जिन्हें फरवरी में हर विधानसभा में जाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. गौरतलब है कि राज्य में मुस्लिम और यादव की कंबाइंड स्ट्रेंथ 30 प्रतिशत है. बीजेपी की रणनीति यादव-मुस्लिम गठजोड़ से पार पाने की है. बीजेपी का फोकस महादलित, ईबीईसी और उन वोटरों पर है जो स्थानीय मुद्दों से प्रभावित होते हैं.