नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर में अगले महीने होने वाले पंचायत चुनाव और स्थानीय निकाय चुनाव का पीडीपी बहिष्कार करेगी. पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जब तक केंद्र इस विषय पर अपना रुख स्पष्ट नहीं करता तब तक पीडीपी भी प्रस्तावित पंचायत चुनावों का बहिष्कार करेगी. महबूबा ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में हाल में बने भय और अनिश्चितता के माहौल के बीच कोई भी चुनाव कराना गलत होगा और इसकी विश्वसनीयता पर सवाल भी खड़े होंगे. ऐसे में पीडीपी ने यह फैसला किया है कि वह इस चुनाव में तब तक उम्मीदवारी नहीं करेगी, जब तक की अनुच्छेद 35ए पर बना अनिश्चितता का माहौल खत्म नहीं हो जाता.इस तरह के हालात को देखते हुए पार्टी ने इन चुनावों से दूर रहने का फैसला किया है.

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कुछ दिन पहले ही नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर में होने वाले पंचायत चुनाव के बहिष्कार का फैसला किया था. पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि जब तक केंद्र सरकार अनुच्छेद 35 A को लेकर अपना रुख साफ नहीं कर देती तब तक पार्टी पंचायत चुनाव में भाग नहीं लेगी. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस तब तक इन (पंचायत) चुनावों में भाग नहीं लेगी जब तक भारत सरकार और राज्य सरकार इस (35 A) पर अपना रुख साफ नहीं कर देतीं और अनुच्छेद 35 A को कोर्ट में सुरक्षित रखने के लिए कदम नहीं उठा लेती हैं.

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अनुच्छेद 35-ए के तहत जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों को खास तरह के अधिकार और कुछ विशेषाधिकार दिए गए हैं. अनुच्छेद 35 ए को 1954 में राष्ट्रपति के आदेश (प्रेसीडेंशियल आर्डर) से संविधान में शामिल किया गया था. इसके तहत जम्मू कश्मीर के नागरिकों को कुछ विशेष अधिकार प्राप्त हैं. इस अनुच्छेद में की गई व्यवस्था के तहत राज्य के बाहर का कोई भी व्यक्ति प्रदेश में अचल संपत्ति नहीं खरीद सकता है. यह व्यवस्था प्रदेश की उस महिला को भी संपत्ति अधिकारों से वंचित कर देती है जो राज्य के बाहर विवाह करती है. यह प्रावधान उनके उत्तराधिकारियों पर भी लागू होता है.

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वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर में कानून व्यवस्था की समस्या के बारे केन्द्र और राज्य सरकार के कथन के मद्देनजर संविधान के अनुच्छेद 35-ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई अगले साल जनवरी के लिए स्थगित कर दी है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की खंडपीठ से केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अनुच्छेद 35-ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया था.