
Shivendra Rai
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले शिवेन्द्र राय को हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से इतिहास में एमए ... और पढ़ें
India enhancing its spy satellite system: ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद भारत ने तीनों सेनाओं की युद्धक क्षमता बढ़ाने और दुश्मन के हर कदम पर निगाह रखने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. केंद्र सरकार ने जासूसी उपग्रह प्रणाली से खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है.
‘द मिंट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद सैन्य बलों और सरकार दोनों के लिए स्पाइ सैटेलाइट सिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की गई है. भारत सरकार आसमान से धरती पर दुश्मन के हर ठिकाने और हरकत पर नजर रखने के लिए तीन निजी कंपनियों – अनंत टेक्नोलॉजीज, सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स और अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज के साथ सहयोग कर रही है.
ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान से तनाव से पहले इन कंपनियों के पास कार्य पूरा करने के लिए चार साल का समय था. लेकिन अब समयसीमा को घटाकर 12-18 महीने कर दिया गया है. सरकार का लक्ष्य है कि 2026 या उससे पहले उपग्रहों को ऑपरेशनल कर दिया जाए.
इस परियोजना की जरूरत और महत्व को देखते हुए सरकार से इसे तुरंत मंजूरी मिल गई है. इसकी लागत लगभग 22,500 करोड़ रुपये ($3 बिलियन) होने की उम्मीद है. बता दें कि अंतरिक्ष आधारित निगरानी (एसबीएस-3) कार्यक्रम को अक्टूबर 2024 में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से हरी झंडी मिली थी. इसमें कुल 52 जासूसी उपग्रहों का उत्पादन शामिल है. इनमें से 31 तीन निजी कंपनियों द्वारा विकसित किए जाएंगे और शेष 21 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा विकसित किया जाएगा.
स्पाई सैटैलाइट या जासूसी उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में तैनात अत्याधुनिक तकनीक से लैस ऐसे उपग्रह हैं जो खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए ही बनाए और लॉन्च किए जाते हैं. ये उपग्रह विभिन्न सेंसर और कैमरों का उपयोग करके अंतरिक्ष से धरती के किसी कुछ खास हिस्सों की निगरानी करते हैं.
स्पाई सैटैलाइट का प्रमुख काम हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें लेना होता है. ये सैटेलाइट शक्तिशाली ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड कैमरों से लैस होते हैं. ये जासूसी उपग्रह दिन-रात और खराब मौसम में भी उच्च-गुणवत्ता वाली तस्वीरें ले सकते हैं.
स्पाई सैटैलाइट सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) तकनीक का उपयोग करके रेडियो, माइक्रोवेव, और अन्य संचार सिग्नलों को इंटरसेप्ट करते हैं. इससे
दुश्मन के संचार, रडार, और सैन्य गतिविधियों की जानकारी मिलती है. ये सैटैलाइट सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) का उपयोग करके बादलों या अंधेरे में भी धरती के किसी खास हिस्से की तस्वीरें ले सकते हैं. इन उपग्रहों से सैन्य ठिकानों, जहाजों या मिसाइल लॉन्चरों की निगरानी की जाती है.
उपग्रह द्वारा एकत्रित डेटा को एन्क्रिप्टेड रूप में ग्राउंड स्टेशनों तक भेजा जाता है जहां इसका विश्लेषण किया जाता है.स्पाई सैटैलाइट युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ये उपग्रह दुश्मन के सैन्य ठिकानों, हथियारों, सैनिकों की तैनाती, और मिसाइल लॉन्च की रीयल-टाइम जानकारी प्रदान करते हैं जिससे रणनीति बनाने में मदद मिलती है. सैटैलाइट डेटा से दुश्मन की कमजोरियों, आपूर्ति लाइनों और बुनियादी ढांचे की जानकारी मिलती है. इससे हमले की योजना बनाना आसान हो जाता है.
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