
Shivendra Rai
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले शिवेन्द्र राय को हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से इतिहास में एमए ... और पढ़ें
Indus Waters Treaty: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था. अब केंद्र सरकार सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी को लेकर एक ऐसी योजना बना रही जिससे पाकिस्तान के पसीने छूट जाएंगे. सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) स्थगित होने के बाद जम्मू और कश्मीर में चिनाब नदी पर दो रन-ऑफ-द-रिवर पनबिजली परियोजनाओं बगलिहार और सलाल में पहली बार फ्लशिंग किया गया था. अब केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने सिफारिश की है कि इस तरह की फ्लशिंग एक मासिक रुटीन बनाया जाए.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एनएचपीसी और जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने बिजली उत्पादन में बाधा डालने वाली तलछट को साफ करने के लिए सलाल और बगलिहार जलाशयों (Baglihar and Salal Dam) को फ्लश करना शुरू कर दिया है. 1987 में सलाल और 2008-09 में बगलिहार के निर्माण के बाद से यह इस तरह का पहला प्रयास है. इससे पहले IWT के तहत पाकिस्तान की बार-बार आपत्तियों के कारण इन कार्यों को रोका गया था.
रिपोर्ट के अनुसार मई की शुरुआत में शुरू हुई फ्लशिंग ने 690 मेगावाट सलाल और 900 मेगावाट बगलिहार जलाशयों से 7.5 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) से अधिक तलछट को हटाया. रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि सीडब्ल्यूसी ने अब सिफारिश की है कि दोनों परियोजनाओं के लिए हर महीने फ्लशिंग की जाए और जल्द ही एक एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी की जाएगी.
फ्लशिंग में समय के साथ जलाशयों में जमने वाली तलछट रेत, गाद और मिट्टी को हटाने के लिए संग्रहीत पानी को छोड़ना शामिल है. तलछट जलाशय की क्षमता को कम करती है जलविद्युत उत्पादन को बाधित करती है. इसे नियमित रूप से बाहर निकालकर ऑपरेटर जल भंडारण क्षमता को बढ़ाते हैं. इससे टरबाइन दक्षता में सुधार होता है. ऐसा करने से बिजली उत्पादन सुनिश्चित होता है और जलविद्युत संयंत्रों का जीवन लंबा होता है.
हालांकि पाकिस्तान ने फ्लशिंग को नियमित किए जाने पर आपत्ति जताई है. इस बीच संधि को स्थगित किए जाने के बाद भारत न तो पाकिस्तान के साथ हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करेगा और न ही उसे इन फ्लशिंग ऑपरेशनों के बारे में सूचित करेगा. भारत मध्यम और लंबी अवधि के लिए अब तक
पाकिस्तान की आपत्तियों के कारण रुकी हुई पनबिजली परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने, सिंधु के कुछ प्रवाह को मोड़ने पर विचार करने और नई परियोजनाओं के निर्माण की संभावना तलाशने की योजना बना रहा है.
सिंधु जल संधि के तहत किसी भी नई परियोजना के लिए भारत को छह महीने पहले पाकिस्तान को सूचित करना पड़ता था. सरकार जिन जलविद्युत परियोजनाओं में तेजी लाएगी उनमें पाकल दुल (1,000 मेगावाट), किरू (624 मेगावाट), क्वार (540 मेगावाट) और रतले (850 मेगावाट) शामिल हैं, जो सभी चिनाब नदी पर हैं.
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