नई दिल्ली/पटना. बिहार में बीते छह अप्रैल को शराबबंदी के दो साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के आने वाले गरबी लोगों को इससे सबसे ज्यादा फायदा हुआ है. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, जेल अधिकारियों द्वारा जारी किए गए आंकड़े अलग चीज बयां कर रहे हैं. उनके मुताबिक ये जातियां राज्य की सबसे कमजोर और अधिकार विहीन हैं और शराबबंदी नियम को तोड़ने पर इन्हीं जातियों से जुड़े लोगों पर सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई है.

रिपोर्ट के आंकड़ों पर गौर करें तो शराबबंदी के बाद इस नियम को तोड़ने पर हुई कार्रवाई में बिहार के 8 सेंट्रल, 32 जिला और 17 सब जेल में इन जातियों से ताल्लुक रखने वाले ज्यादा कैदी हैं. राज्य में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 16% है, लेकिन शराबबंदी के नियम को तोड़कर जेल में बंद कैदियों की संख्या 27.1 फीसदी है. राज्य में अनुसूचित जनजाति की संख्या 1.3 फीसदी है, लेकिन जेल में बंद कैदियों की संख्या में इस जाति के 6.8 फीसदी लोग हैं. राज्य में ओबीसी की संख्या 25 फीसदी है, लेकिन कैदियों का औसत देखें तो उनकी संख्या 34.4 फीसदी हैं.

80% नियमित पीने वाले कैदी
जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पिछले दो साल में उनकी जेल में बंद हुए कैदियों में 80% नियमित पीने वाले थे. पूर्व कैदियों और समाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकार लीकर माफियाओं को नहीं पकड़ रही है और छोटे लोगों पर कार्रवाई कर रही है.

12 मार्च को आया था टैक्स्ट
सेंट्रल जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उसे 12 मार्च को हेडक्वार्टर से एक टेक्स मैसेज मिला था. इसमें कहा गया था कि शराबबंदी के नियम तोड़ने वाले कैदियों को कैटेगरी के अनुसार बांटकर बताना है. इसके बाद डेटा को कंपाइल करके भेज दिया गया. यह एक अनाधाकिरिक सर्वे था, जो जातियों के अनुसार, कैदियों की आदत और सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर था. मार्च अंत तक लगभग सभी जेल अधिकारियों ने डेटा को भेज दिया था.

अधिकारियों ने किसी तरह की जानकारी से किया इनकार
हालांकि, रिपोर्टे में ये भी कहा गया है कि उन्होंने राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारियों, सचिवों और पुलिस अधिकारियों से बात की, लेकिन किसी ने भी इस सर्वे या रिपोर्ट के बारे में जानने से इनकार कर दिया. उनका तो यहां तक कहना था कि उन्हें ये भी नहीं पता कि इस तरह के सर्वे के लिए कोई निर्देश जारी हुआ है.